पीएम की ओर से अजमेर दरगाह में चादर चढ़ाने पर नहीं लगेगी रोक, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

नई दिल्ली
अजमेर में स्थित सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर सालाना उर्स के दौरान प्रधानमंत्री और अन्य संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों की ओर से चादर चढ़ाने की परंपरा को चुनौती देने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस फैसले का अजमेर कोर्ट में चल रहे मामले पर कोई असर नहीं पड़ेगा। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि ऐसे मुद्दों पर संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत फैसला नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की गई टिप्पणियों का अजमेर की अदालत में दरगाह द्वारा शंकर मोचन महादेव मंदिर पर कथित "अवैध कब्जे" के संबंध में लंबित मुकदमे पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
यह याचिका विश्व वैदिक सनातन संघ के प्रमुख जितेंद्र सिंह बिसेन ने दायर की थी। याचिका में कहा गया कि भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 1947 में पहली बार अजमेर शरीफ में चादर चढ़ाने की परंपरा शुरू की थी और इसके बाद हर साल यह परंपरा निभाई जाती रही, लेकिन यह प्रथा ना तो किसी कानून में लिखी है और ना ही यह संविधान के अनुरूप है।
याचिका में यह भी दावा किया गया कि इस दरगाह के स्थान पर पहले एक प्राचीन शिव मंदिर था। इस विषय पर पहले ही अजमेर कोर्ट में एक मामला विचाराधीन है। ऐसे में याचिकाकर्ता का तर्क था कि पेंडिंग केस के दौरान चादर चढ़ाने की परंपरा उस मामले को प्रभावित कर सकती है।
गौरतलब है कि ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के 814वें उर्स पर 22 दिसंबर को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रधानमंत्री मोदी और केंद्र सरकार की ओर से अजमेर दरगाह में चादर और फूल चढ़ाए। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री ने सम्मान के प्रतीक के रूप में पवित्र दरगाह पर चादर चढ़ाई। वहीं, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार की तरफ से अलग चादर चढ़ाई थी।

admin

Related Posts

645 हमले, एक साल! बांग्लादेश में हिंदू उत्पीड़न पर यूनुस सरकार की चौंकाने वाली रिपोर्ट

ढाका बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने सोमवार को कहा कि 2025 के दौरान देश में अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों से जुड़ी अधिकतर घटनाएं 'आपराधिक प्रकृति' की थीं और उनका सांप्रदायिक…

बंगाल SIR पर सुप्रीम टिप्पणी: CJI सूर्यकांत बोले– जनता के मानसिक दबाव को समझे चुनाव आयोग

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने आज (सोमवार,19 जनवरी को) भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को साफ निर्देश दिया कि पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) के दौरान…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

आज का राशिफल 20 जनवरी: ग्रहों की स्थिति से जानें दिन कैसा रहेगा

आज का राशिफल 20 जनवरी: ग्रहों की स्थिति से जानें दिन कैसा रहेगा

कब मनाई जाएगी बसंत पंचमी—22 या 23 जनवरी? तिथि, पूजा समय और विधि की पूरी जानकारी

कब मनाई जाएगी बसंत पंचमी—22 या 23 जनवरी? तिथि, पूजा समय और विधि की पूरी जानकारी

क्या आप सही तरीके से पढ़ते हैं हनुमान चालीसा? जानिए 10 जरूरी नियम और आम भूलें

क्या आप सही तरीके से पढ़ते हैं हनुमान चालीसा? जानिए 10 जरूरी नियम और आम भूलें

गरुड़ पुराण के अनुसार अंतिम संस्कार में 5 प्रकार के लोग नहीं कर सकते भागीदारी

गरुड़ पुराण के अनुसार अंतिम संस्कार में 5 प्रकार के लोग नहीं कर सकते भागीदारी

वसंत पंचमी 2026: करियर को मिले रॉकेट जैसी रफ्तार, अपनाएं ये 5 खास उपाय

वसंत पंचमी 2026: करियर को मिले रॉकेट जैसी रफ्तार, अपनाएं ये 5 खास उपाय

आज का दिन कैसा रहेगा? 19 जनवरी का संपूर्ण राशिफल

आज का दिन कैसा रहेगा? 19 जनवरी का संपूर्ण राशिफल