इतिहास और राष्ट्रगौरव की चेतना का स्रोत बनेगा पीएम मोदी का लेख: स्वामी अवधेशानंद गिरि

नई दिल्ली
पंचदशनाम जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने सोमवार को सोमनाथ विध्वंस के 1,000 साल पूरे होने पर पीएम मोदी के पोस्ट पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि आपका यह लेख आने वाली पीढ़ियों में इतिहास-बोध और राष्ट्र-गौरव के जागरण का सबल माध्यम सिद्ध होगा। पंचदशनाम जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "प्रधानमंत्री, आपका यह आलेख स्मरण कराता है कि सोमनाथ केवल एक तीर्थ ही नहीं, बल्कि यह भारत की आत्मा का प्रतीक है।

समय-समय पर आए प्रहारों के बीच भी जिस श्रद्धा और समर्पण ने इसे पुनः उठाया, वही हमारी सभ्यता का अदम्य साहस है। आपका यह लेख आने वाली पीढ़ियों में इतिहास-बोध और राष्ट्र-गौरव के जागरण का सबल माध्यम सिद्ध होगा।" उन्होंने कहा कि एक हजार साल पहले विदेशी आक्रमणकारी गजनी के महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया था। ये आक्रमण हमारे मंदिर पर नहीं था, ये हमारी संस्कृति और उस संस्कृति पर था जो पूरा देश अपना मानता है। तब से मंदिर निर्माण के अनेक प्रयास हुए हैं। लगभग 75 वर्ष पहले इसका निर्माण हो पाया था। आज के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लेख भारत के गौरवशाली अतीत का स्मरण करता है।

मशहूर आध्यात्मिक गुरु और पद्म भूषण से सुशोभित श्री एम ने कहा कि सोमनाथ का ज्योतिर्लिंग शुद्ध प्रकाश से बना है और उसे कोई भी नष्ट नहीं कर सकता। लगभग 1,000 वर्ष पूर्व, महमूद गजनी ने सोमनाथ को तोड़ा और उजाड़ा था, जिस दिन को हम आज पीड़ा के साथ स्मरण करते हैं। लेकिन क्या सोमनाथ को, जो स्वयं एक ज्योति है, नष्ट किया जा सकता है? आज भी हम गुजरात में सोम के भगवान को श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं। मैं प्रधानमंत्री मोदी के विचार से सहमत हूं।

1299 में अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति अलाफ खान ने फिर मंदिर को नष्ट किया और मूर्ति के टुकड़े दिल्ली ले गया। कुछ सालों बाद हिंदू शासकों ने इसे फिर से खड़ा किया। 1394 में गुजरात के गवर्नर मुजफ्फर खान ने मंदिर को तोड़ा। 1459 में महमूद बेगड़ा ने भी सोमनाथ को अपवित्र किया। इसके बावजूद मंदिर किसी न किसी रूप में विद्यमान रहा। बता दें कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मनाने के लिए गुजरात के सोमनाथ मंदिर में सालभर कई कार्यक्रम होंगे। अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि 8 से 11 जनवरी तक मंदिर परिसर में कई आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यक्रम होंगे। प्रधानमंत्री मोदी 11 जनवरी को इस कार्यक्रम में शिरकत करेंगे।

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