स्कूल में पीटी करते समय गिरी छठी की छात्रा, 13 साल की बच्ची की हार्ट अटैक से मौत की आशंका

धार 

 धार जिले के बदनावर इलाके में पिछले कई दिनों से कड़ाके की ठंड का दौर जारी है। इसका दुष्प्रभाव बच्चों पर दिखाई देने लगा है। इसी कड़ी में आज सुबह यहां नवोदय विद्यालय मुलथान में छात्रा की स्कूल के मैदान में खड़े-खड़े हार्ट अटैक आने से मौत हो गई। बच्ची का नाम निशा पिता राहुल सूर्यवंशी निवासी ग्राम मुलथान बताया जा रहा है। हैरानी की बात ये है कि, जिस छात्रा की साइलेंट अटैक से मौत हुई है, उसकी उम्र महज 13 साल थी और वो स्कूल की 6वीं कक्षा में पढ़ती थी।

मिली जानकारी के अनुसार, छात्रा रोजाना की तरह सुबह पीटी के लिए मैदान में अन्य बच्चों के साथ गई थी। तभी 7:15 बजे वो अचानक गिरी तो बच्चों के साथ-साथ मैदान में मौजूद शिक्षकों ने उसे संभाला लेकिन बच्ची में कोई हलचल मेहसूस न होने से उसे तत्काल बदनावर के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने परीक्षण कर उसे मृत घोषित कर दिया।

निशा रोज की तरह सुबह पीटी के लिए बाकी बच्चों के साथ ग्राउंड पर गई थी। सुबह करीब सवा 7 बजे वह पीटी करते-करते अचानक गिर पड़ी। ग्राउंड पर मौजूद बच्चों और टीचर्स ने उसे संभाला। शरीर में कोई हलचल नहीं होने पर उसे फौरन सिविल अस्पताल, बदनावर ले गए।

अस्पताल में डॉक्टरों ने चेकअप के बाद निशा को मृत घोषित कर दिया। तहसीलदार सुरेश नागर भी सिविल अस्पताल पहुंचे। डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमॉर्टम किया। अस्पताल की सूचना पर पहुंची पुलिस ने पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजन को सौंप दिया।

 

पोस्टमार्टम रिपोर्ट खोलेगी मौत का राज

बाद में अस्पताल की सूचना पर पुलिस ने मर्ग कायम कर शव का पोस्टमार्टम कराया। इसके बाद शव को परिजन के सुपुर्द कर दिया। हालांकि, अभी मौत के स्पष्ट कारणों का पता नहीं चल सका है, लेकिन कड़ाके की ठंड में अल सुबह खुले मैदान में खेलने से उसकी मौत होने का शक है। इस असामयिक घटना के बाद स्कूल में हड़कंप मच गया। फिलहाल, स्कूल में शोक की लहर है।

बच्चों को लेकर माता-पिता रखें ये ध्यान

ठंड में बड़ों के साथ-साथ बच्चों को भी हार्ट अटैक का खतरा बना रहता है। इससे बचने के लिए बुजुर्गों की तरह बच्चों को भी गर्म कपड़ों में रखें। घर के अंदर खेलने या हल्की-फुल्की कसरत (जैसे योग) कराएं। भरपूर तरल पदार्थ (गुनगुना पानी, सूप) पिलाएं। पौष्टिक आहार दें और ज्यादा ठंड में बाहर निकलने से रोकें, ताकि रक्त वाहिकाएं सिकुड़ें नहीं और हृदय पर अतिरिक्त दबाव न पड़े, खासकर अगर बच्चे को पहले से कोई हृदय संबंधी समस्या हो तो डॉक्टर की सलाह लेना ज़रूरी है।

बच्चों को सुरक्षित रखने के उपाय

-गर्म और परतदार कपड़े पहने : बच्चे को हमेशा गर्म, ऊनी कपड़े, मोज़े, दस्ताने और टोपी पहनाएं, खासकर बाहर जाते समय।

-घर के अंदर रखें : बहुत ज़्यादा ठंड या कोहरे के दौरान बच्चों को घर के अंदर ही खेलने दें। बाहर की गतिविधियां (जैसे मॉर्निंग वॉक) बहुत अधिक ठंड में टालें।

-हाइड्रेटेड रखें : ठंड में भी शरीर को पानी की ज़रूरत होती है। उन्हें गुनगुना पानी, सूप, हर्बल चाय पिलाएं।

-पौष्टिक आहार : फल, सब्जियां, फाइबर और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर भोजन दें। तैलीये और ज़्यादा नमक/चीनी वाले खाने से बचाएं।

-शारीरिक गतिविधि (घर के अंदर) : हल्के व्यायाम, स्ट्रेचिंग या योग कराएं, जो घर के अंदर किए जा सकें।

-तनाव से बचाएं : बच्चों को तनावमुक्त रखें। उनका मनपसंद काम करने दें और सकारात्मक माहौल दें।

-बीमारियों से बचाव : सर्दी-खांसी-जुकाम होने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें. फ्लू और अन्य संक्रमणों से बचाने के लिए टीका लगवाएं।
किन लक्षणों पर ध्यान दें (अगर बच्चा बीमार हो)

-सांस लेने में तकलीफ
-सीने में दर्द या बेचैनी
-बहुत ज़्यादा थकान
-होंठों या उंगलियों का नीला पड़ना
-तेज़ धड़कन

नोट- अगर ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
माता-पिता के लिए अतिरिक्त सलाह

-बच्चों को समय पर दवा दें (यदि कोई दवा चल रही है)।
-ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराएं, खासकर अगर जोखिम हो।

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