संकट चौथ पर गणपति को लगाएं तिल-गुड़ के लड्डू का भोग

आज देशभर में सकट चौथ (तिलकुटा चौथ) का पर्व मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में यह पर्व भगवान गणेश को समर्पित माना गया है। महिलाएं यह व्रत अपनी संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सकट चौथ पर तिल का दान और प्रसाद के रूप में तिल-गुड़ के लड्डू का भोग लगाने से भगवान गणेश प्रसन्न होकर जीवन के सभी संकटों को दूर करते हैं। भगवान गणेश को समर्पित इस पावन दिन पर जब तिल और गुड़ आपस में मिलते हैं, तो वह केवल एक मिठाई नहीं बल्कि बप्पा के भक्तों के लिए सौभाग्य और आरोग्यता का आशीर्वाद बन जाते हैं। अगर आपने भी भगवान गणपति को प्रसन्न करने के लिए सकट चौथ का उपवास रखा है तो आइए जान लेते हैं क्या है इस दिन प्रसाद में चढ़ाए जाने वाले तिल-गुड़ के लड्डू की रेसिपी।

तिल-गुड़ के लड्डू बनाने के लिए सामग्री

  • -250 ग्राम सफेद तिल
  • -1.5 कप कद्दूकस किया हुआ गुड़
  • -1/4 कप भुने और कुचले हुए मूंगफली के दाने
  • -1/2 छोटा चम्मच इलायची पाउडर
  • -1 बड़ा चम्मच घी

तिल-गुड़ के लड्डू बनाने का तरीका

तिल गुड़ के लड्डू बनाने के लिए सबसे पहले एक भारी तले की कड़ाही में तिल डालकर धीमी आंच पर भूनें। जब तिल फूल जाएं और चटक कर हल्का रंग बदलने लगे तो इन्हें एक प्लेट में निकाल लें। ध्यान रहे कि तिल जलने न पाएं, वरना लड्डू का स्वाद कड़वा हो जाएगा।

गुड़ की चाशनी- अब लड्डू की मिठास के लिए उसी कड़ाही में 1 चम्मच घी डालकर गुड़ डाल दें। इसमें 1-2 चम्मच पानी मिलाएं ताकि गुड़ आसानी से पिघल जाए। धीमी आंच पर गुड़ के पिघलने तक पकाएं। जब गुड़ में झाग आने लगे, तो एक कटोरी पानी में गुड़ की एक बूंद डालकर देखें। अगर वह फैलने की जगह जम जाए और एक नरम गेंद बन जाए, तो चाशनी तैयार है।

मिश्रण तैयार करें- अब आंच बंद करके चाशनी में भुने हुए तिल, कुचली हुई मूंगफली और इलायची पाउडर डालकर जल्दी-जल्दी अच्छी तरह मिलाएं।

लड्डू बांधें- मिश्रण जब हल्का गर्म हो उसी समय हाथों पर थोड़ा पानी या घी लगाकर छोटे-छोटे लड्डू बना लें। ठंडा होने पर यह मिश्रण सख्त हो जाएगा, इसलिए इसे जल्दी करने की कोशिश करें। आपके सकट चौथ के व्रत के लिए टेस्टी हेल्दी लड्डू बनकर तैयार हैं।

admin

Related Posts

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बताया गया है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। मान्यता है कि एकादशी के दिन विधि-विधान से…

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है. जब प्रदोष व्रत शुक्रवार के दिन पड़ता है, तो इसे शुक्र प्रदोष कहा जाता है. यह व्रत न केवल भगवान शिव…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति