28 जनवरी से राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र, फरवरी के दूसरे सप्ताह में बजट की तैयारी

जयपुर

 

राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू होगा। राज्यपाल की मंजूरी के बाद सोमवार देर शाम विधानसभा सचिवालय ने सत्र बुलाने की अधिसूचना जारी कर दी है। सभी विधायकों को इसकी सूचना भेज दी गई है। बजट सत्र मार्च तक चलने की संभावना है। सत्र की शुरुआत 28 जनवरी को राज्यपाल के अभिभाषण से होगी। इस दौरान सरकार अपनी प्रमुख उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं को प्रस्तुत करेगी। पहले दिन अभिभाषण के बाद दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि दी जाएगी, जिसके पश्चात सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी जाएगी। इसके बाद कार्य सलाहकार समिति (BAC) की बैठक होगी, जिसमें सत्र के कामकाज का एजेंडा तय किया जाएगा। राज्यपाल के अभिभाषण पर तीन से चार दिन तक बहस होगी। बहस के बाद सरकार की ओर से जवाब दिया जाएगा। सरकार के जवाब के बाद एक सप्ताह का अवकाश संभव है।

फरवरी के दूसरे सप्ताह में पेश हो सकता है बजट

सरकार फरवरी के दूसरे सप्ताह में बजट पेश कर सकती है, हालांकि इस पर अंतिम निर्णय अभी शेष है। बजट में कई नई योजनाओं और कार्यक्रमों की घोषणा होने की संभावना है।

दो बच्चों की बाध्यता हटाने का बिल लाएगी सरकार

बजट सत्र के दौरान सरकार पंचायतीराज और शहरी निकाय चुनावों में दो बच्चों की बाध्यता हटाने के लिए विधेयक लाने की तैयारी में है। इसके लिए पंचायतीराज कानून और नगरपालिका कानून में संशोधन से जुड़े दो अलग-अलग बिल सदन में पेश किए जाएंगे। इनके ड्राफ्ट तैयार हो चुके हैं। इसके अलावा आधा दर्जन अन्य विधेयक भी बजट सत्र में लाए जा सकते हैं।

हंगामेदार रहने के आसार, विपक्ष के तेवर सख्त

विधानसभा का बजट सत्र हंगामेदार रहने की संभावना है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि कांग्रेस विधायक दल सरकार को हर मोर्चे पर घेरने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि यह सत्र सरकार के दो वर्षों के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड साबित होगा। टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि सरकार पहले बजट में बड़ी घोषणाएं करती है और बाद में फिजिबिलिटी का हवाला देकर उन्हें रद्द कर देती है। उन्होंने कहा कि यह पहली बार हो रहा है कि घोषणाओं के बाद उनकी व्यवहारिकता जांची जा रही है, जबकि यह काम पहले होना चाहिए। उन्होंने सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए कहा कि एफआरबीएम की सीमा को पार किया जा रहा है और जनता की गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा सिर्फ ब्याज भुगतान में खर्च हो रहा है। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच ज्यादा कर्ज लेने की होड़ लगी हुई है।

 

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