आधी रात का पॉलिटिकल ड्रामा: BJP ने साथी दलों के सामने रखी 56 सीटों और 3 मंत्रियों की शर्त, जानिए अंदर की बात

नई दिल्ली
दक्षिणी राज्य तमिलनाडु में भगवा झंडा लहराने और सत्ता का स्वाद चखने के लिए केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने साथी दल और राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी AIADMK पर दबाव बढ़ा दिया है। इसी के तहत भाजपा ने पहली बार AIADMK के सामने अनोखी शर्त रखी है। एक बड़े बदलाव और अहम सियासी घटनाक्रम के तहत BJP ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले अपने गठबंधन सहयोगी AIADMK के साथ बातचीत में एक बड़ा और असामान्य कदम उठाया है। पार्टी ने सिर्फ सीट बंटवारे तक सीमित न रहते हुए, चुनाव बाद सरकार बनने की स्थिति में कैबिनेट में हिस्सेदारी की औपचारिक मांग रखी है। यह एक ऐसी मांग है जो सीट-बंटवारे से कहीं आगे तक जाती है और राज्य की राजनीतिक परंपराओं को हिला सकती है।
 
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार देर रात दिल्ली में हुई एक अहम बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और AIADMK के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी (EPS) से कहा कि अगर AIADMK के नेतृत्व वाला एनडीए तमिलनाडु में सत्ता में आता है, तो BJP को कम से कम तीन कैबिनेट मंत्री पद देने होंगे। सूत्रों के मुताबिक, तीन मंत्री पद के साथ ही BJP ने यह भी प्रस्ताव रखा कि उसे आगामी चुनावों में 56 सीटें दी जाए, ताकि वह और उसके अन्य सहयोगी मिलकर राज्य विधानसभा का चुनाव लड़ सकें।

AIADMK का तत्काल सहमति से इनकार
वरिष्ठ AIADMK नेताओं के अनुसार, यह प्रस्ताव राज्य की राजनीतिक परंपराओं के लिहाज़ से अभूतपूर्व है। बैठक के दौरान EPS ने अमित शाह की इस मांग पर कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया और साफ कहा कि इस पर पार्टी स्तर पर व्यापक चर्चा की ज़रूरत है। एक वरिष्ठ AIADMK नेता ने बताया कि पलानीस्वामी ने अमित शाह को आगाह किया कि चुनाव से पहले सत्ता में हिस्सेदारी का संकेत देना मतदाताओं के बीच नकारात्मक संदेश दे सकता है। ईपीएस ने शाह को यह भी बताया कि राज्य की जनता इसे स्वीकार नहीं करेगी और इससे DMK के उस प्रचार को बल मिलेगा कि AIADMK की जीत का मतलब तमिलनाडु में बीजेपी का शासन होगा। EPS ने मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के हालिया बयान का भी हवाला दिया, जिसमें उन्होंने यही दावा किया था।

56 सीटों पर कब्जा चाहती है भाजपा
सूत्रों के मुताबिक, BJP चाहती है कि 234 सदस्यों वाली विधानसभा में 56 सीटें उसके कोटे में रहें, ताकि वह उन्हें अपने सहयोगी दलों में बांट सके। इन सहयोगियों में AIADMK के असंतुष्ट नेता ओ. पन्नीरसेल्वम (OPS) और टी.टी.वी. दिनाकरन के गुट शामिल हैं। इनके अलावा,छोटे क्षेत्रीय दल जैसे पुथिया तमिझगम और PMK संस्थापक एस. रामदास का धड़ा भी है। गौरतलब है कि PMK प्रमुख अंबुमणि रामदास पहले ही AIADMK नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल हो चुके हैं।

NDA को फिर से मजबूत करने की कवायद
तमिलनाडु में NDA को पुनर्गठित करने की कोशिशें अमित शाह के हालिया तिरुचि दौरे के बाद तेज़ हुईं हैं। इसके बाद BJP नेतृत्व ने गठबंधन से दूर हुए नेताओं और दलों से दोबारा संपर्क साधना शुरू किया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, टी.टी.वी. दिनाकरन को इस सप्ताह दिल्ली बुलाया जा सकता है। इनके अलावा ओ. पन्नीरसेल्वम को भी जल्द आमंत्रण मिलने की संभावना है। दोनों नेता हाल के हफ्तों में अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK)से भी बातचीत कर चुके हैं।

DMDK की वापसी की अटकलें, अन्नामलाई फिर सक्रिय
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि दिवंगत नेता विजयकांत की पार्टी DMDK एक बार फिर NDA में लौट सकती है। 9 जनवरी को होने वाली DMDK की अहम बैठक को इस लिहाज से निर्णायक माना जा रहा है, हालांकि पार्टी DMK से भी संपर्क में बताई जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम में BJP के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई की सक्रियता भी खास रही। वे अमित शाह के साथ तिरुचि से दिल्ली लौटे और 6 जनवरी को वरिष्ठ AIADMK नेता एस.पी. वेलुमणि के साथ रणनीतिक चर्चा की। वेलुमणि ने बाद में EPS को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी।
 
पोंगल से पहले बड़ा राजनीतिक संदेश देने की तैयारी
EPS और अमित शाह के बीच बुधवार रात करीब एक घंटे तक बैठक चली। तमिलनाडु BJP के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, "हमें उम्मीद है कि 15 जनवरी (पोंगल) तक NDA एक ज़्यादा व्यापक, संतुलित और एकजुट रूप में सामने आएगा। हमारा लक्ष्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस महीने के अंत में होने वाले तमिलनाडु दौरे से पहले सभी सहयोगियों को साथ लाना है।” हालांकि, उन्होंने कहा, “गठबंधन को झटके लगे हैं, लेकिन यह टूटने से बहुत दूर है।”

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