मायावती ने अपने जन्मदिन पर खेला ब्राह्मण कार्ड, सरकार में मिलेगा पूरा मान-सम्मान

लखनऊ
 बसपा सुप्रीमो मायावती ने गुरुवार को राजधानी लखनऊ में अपने 70वें जन्मदिन के मौके पर बड़ा सियासी दांव चला. उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले दिनों 2025 में शीतकालीन सत्र में सपा, कांग्रेस और बीजेपी के ब्राह्मण विधायकों ने बैठक की. ब्राह्मण विधायकों ने बीजेपी सरकार में उपेक्षा का मुद्दा उठाया है.  इसी तरह क्षत्रिय समाज के विधायकों की बैठक हुई थी. हाल के ही दिनों में सवर्ण समाज के साथ जो कुछ हुआ है वह किसी से छिपा नहीं है. बसपा सरकार बनने पर पार्टी उन्हें पूरा सम्मान देगी.

मायावती ने कहा कि ‘हमने ब्राह्मण समाज को हमेशा प्रतिनिधित्व दिया. ब्राह्मणों को किसी के बहकावे में नहीं आना चाहिए. ब्राह्मणों को किसी का बाटी चोखा नहीं खाना चाहिए. ब्राह्मणों पर किसी तरह का अत्याचार न हो इसलिए बीएसपी की सरकार जरूरी है.’ मायावती ने क्षत्रिय विधायकों का भी जिक्र कर कहा कि उनका भी पार्टी में पूरा सम्मान होगा. उन्होंने कहा कि बसपा सरकार में सर्व समाज का कल्याण हुआ. किसी को भी जातिवादी पार्टियों के बहकावे में नहीं आना चाहिए.
बसपा सरकार में नहीं हुआ दंगा

मायावती ने कहा कि बसपा सरकार में कभी मंदिर-मस्जिद का मुद्दा नहीं उठा. हमारी सरकार में कभी कोई दंगा नहीं हुआ. हमारी सरकार ने सर्वजन सुखाय सर्वजन हिताय के मूल सिद्धांत पर काम करती रही है. इतना ही नहीं हमारी सरकार में कानून व्यवस्था भी मजबूत रही है.मायावती ने कहा कि बसपा सरकार में जो योजनाएं लाई गईं उन्हीं को आगे के सरकारों ने नाम बदलकर आगे बढ़ाया है. एक्सप्रेसवे को लेकर उन्होंने कहा कि एक्सप्रेसवे बनाने का रोडमैप उनकी सरकार में ही बन गया था.  एक आध तो बन भी गए थे. उन्होंने बहुजन समाज को भी चेताते हुए कहा कि जातिवादी पार्टियों के बहकावे में नहीं आना है.
अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान

मायावती ने कहा, “हमारी पार्टी पूरी तरह हर स्तर पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है और EVM में धांधली और बेइमानी नहीं की जाती है तो परिणाम बेहतर होंगे. हम स्तर पर पार्टी को मजबूत कर रहे हैं और क्या पता बाद में EVM को हटा दिया जाए जैसे अन्य कई देशों में हुआ है. हमारी पार्टी का गठबंधन करके चुनाव लड़ने का अनुभव ये रहा है कि इससे पार्टी को नुकसान होता है और गठबन्धन करके चुनाव लड़ने वाली पार्टी को लाभ मिल जाता है. क्योंकि दलित वोटबैंक तो दूसरी पार्टी को मिल जाता है, लेकिन उनकी पार्टी का वोट हमारी पार्टी को नहीं मिलता है.  हमारी पार्टी उत्तर प्रदेश विधान सभा और लोक सभा चुनाव अकेले लड़ना बेहतर समझा है, और हम कोई भी चुनाव गठबंधन करके नहीं लड़ेंगे. आगे चलकर जब पूरा भरोसा हो जाएगा कि बसपा से गठबंधन करके वो हमारी पार्टी में भी अपना वोट ट्रासंफर करा सकती है तो सोचा जा सकता, लेकिन उसमें वर्षों लगेंगे.

admin

Related Posts

अजित पवार की मौत पर सियासत तेज: ममता बोलीं– सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो जांच, भरोसा खत्म

कोलकाता महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता अजित पवार का बुधवार सुबह एक दुखद विमान दुर्घटना में निधन हो गया। यह हादसा पुणे जिले के…

‘अयोध्या से कटियार ही लड़ें’— बृजभूषण शरण सिंह का बड़ा बयान, सियासत में साजिश का आरोप

गोंडा कैसरगंज के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा है कि अयोध्या लोकसभा सीट पर पहला हक विनय कटियार का है और उन्हें ही चुनाव लड़ना चाहिए। उन्होंने यह…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति