PM मोदी बोले- डिजिटल पेमेंट से स्वास्थ्य तक, भारत ने दुनिया में बनाई सशक्त पहचान

नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में राष्ट्रमंडल देशों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (सीएसपीओसी) 2026 का उद्घाटन किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने भारत की लोकतांत्रिक यात्रा, आर्थिक उपलब्धियों, सामाजिक समावेशन और वैश्विक योगदान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत में लोकतंत्र केवल एक शासन प्रणाली नहीं है, बल्कि हमारे मूल्यों, सोच और कार्यप्रणाली का अभिन्न हिस्सा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत आज कई क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व कर रहा है। भारत का यूपीआई दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल भुगतान प्रणाली बन चुका है। इसके साथ ही भारत विश्व का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक देश है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक है और यहां तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम मौजूद है। वैश्विक विमानन बाजार में भारत तीसरे स्थान पर है, जबकि दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क और तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो रेल नेटवर्क भी भारत के पास है। इसके अलावा भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक और तीसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में लोकतंत्र इसलिए परिणाम देता है, क्योंकि देश के हर नागरिक की प्राथमिकता सबसे ऊपर है। उन्होंने कहा, "हम बिना किसी भेदभाव के सार्वजनिक कल्याण की भावना से हर व्यक्ति के लिए काम कर रहे हैं।" इसी सोच का परिणाम है कि पिछले कुछ वर्षों में देश में करीब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। उन्होंने इसे 'डेमोक्रेसी डिलीवर्स,' यानी लोकतंत्र के परिणाम देने का जीवंत उदाहरण बताया।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत में लोगों की आकांक्षाओं और सपनों को ठोस कार्यों में बदला गया है। प्रक्रियाओं से लेकर तकनीक तक हर क्षेत्र में लोकतंत्रीकरण किया गया ताकि आम नागरिक के रास्ते में कोई बाधा न आए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक भावना हमारी नसों में दौड़ती है, हमारे विचारों में बसती है और हमारे मूल्यों में रची-बसी है। कोविड-19 महामारी का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ वर्ष पहले पूरी दुनिया इस संकट से जूझ रही थी और भारत भी इससे अछूता नहीं था, लेकिन इन चुनौतियों के बीच भारत ने 150 से अधिक देशों को दवाइयां और वैक्सीन उपलब्ध कराईं। लोगों का स्वास्थ्य, कल्याण और भलाई भारत के मूल्यों में निहित है, और ये मूल्य हमें हमारे लोकतंत्र से मिले हैं।
प्रधानमंत्री ने भारत के लोकतंत्र के विशाल स्वरूप पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि 2024 में हुए आम चुनाव मानव इतिहास का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक अभ्यास था। करीब 98 करोड़ नागरिक मतदाता के रूप में पंजीकृत थे, जो कुछ महाद्वीपों की कुल आबादी से भी अधिक है। इन चुनावों में 8,000 से अधिक उम्मीदवार और 700 से ज्यादा राजनीतिक दलों ने भाग लिया। खास बात यह रही कि महिला मतदाताओं की भागीदारी रिकॉर्ड स्तर पर रही।
महिलाओं की भूमिका पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारतीय महिलाएं केवल भागीदारी नहीं कर रहीं, बल्कि नेतृत्व भी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि देश की राष्ट्रपति एक महिला हैं और जिस दिल्ली शहर में यह सम्मेलन हो रहा है, वहां की मुख्यमंत्री भी महिला हैं। ग्रामीण और स्थानीय निकायों में करीब 15 लाख निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं, जो लगभग 50 प्रतिशत जमीनी स्तर के नेतृत्व का प्रतिनिधित्व करती हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह आंकड़ा वैश्विक स्तर पर बेजोड़ है।
भारत की विविधता का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि देश में सैकड़ों भाषाएं बोली जाती हैं और 900 से अधिक टीवी चैनल विभिन्न भाषाओं में प्रसारित होते हैं। हजारों अखबार और पत्रिकाएं प्रकाशित होती हैं। उन्होंने कहा कि इतनी व्यापक विविधता को बहुत कम समाज इतनी सफलतापूर्वक संभाल पाते हैं। भारत इस विविधता का उत्सव मनाता है, क्योंकि हमारे लोकतंत्र की नींव मजबूत है। प्रधानमंत्री ने भारत के लोकतंत्र की तुलना एक विशाल वृक्ष से करते हुए कहा कि यह गहरी जड़ों से समर्थित है। उन्होंने विश्वास जताया कि यही मजबूत लोकतांत्रिक आधार भारत को भविष्य में भी प्रगति, समावेशन और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाता रहेगा।

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