धीरेंद्र शास्त्री ने छतरपुर में आरएसएस को लेकर कहा- ‘अगर RSS न होता तो इतने हिंदू भी न बचते’

छतरपुर

जिले के बड़ामलहरा में आयोजित हिंदू सम्मेलन के दौरान बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बड़ा बयान दिया है। आरएसएस के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने संघ की सराहना करते हुए कहा कि अगर भारत में आरएसएस न होता, तो आज हिंदू नहीं बचा होता।

आरएसएस न होता तो हिंदू नहीं बचता: बाबा बागेश्वर

बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों का जिक्र करते हुए महाराज ने चेतावनी दी कि यदि हिंदू आज एकजुट नहीं हुए, तो आने वाले समय में यहां भी बांग्लादेश जैसे हालात पैदा हो सकते हैं। उन्होंने सनातनियों से जातिवाद छोड़कर एक होने का आह्वान किया। इस सम्मेलन में हजारों की संख्या में श्रद्धालु और हिंदू संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे।

पीढ़ियों को संस्कार भी सौंपने चाहिए

अपने संबोधन में बागेश्वर महाराज ने कहा कि हम अपनी संपत्ति और व्यापार आने वाली पीढ़ियों के लिए बचाकर रखते हैं, लेकिन इसके साथ ही हमें अपनी पीढ़ियों को संस्कार भी सौंपने चाहिए। उन्होंने दोहराया कि देश में आरएसएस न होता तो शायद आज जो हिंदू बचे हैं, वे भी न होते।

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भरे मंच से आरएसएस की तारीफ करते हुए कहा, ''भारत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अगर न होता तो इतना भी हिंदू न बचा होता. डॉक्टर हेडगेवार की परंपरा ने अभूतपूर्व कार्य किया. गांव-गांव, गली-गली में समस्त हिंदू समाज को एकजुट करने का कार्य किया.'' 

यह बात बागेश्वर महाराज पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने गृह जिले छतरपुर के बड़ा मलहरा के हिंदू एकता वाले मंच से कही. बागेश्वर बाबा ने इस बात पर गर्व जताया कि आज भारत RSS का शताब्दी वर्ष मना रहा है. उन्होंने कहा कि 100 वर्षों की यह तपस्या ही है जो आज हिंदू समाज को संगठित होने का साहस दे रही है.

इतना ही नहीं, शास्त्री ने जोर देकर कहा कि जिसके पास ताकत है, समझ लेना उसके पास एकता है. एकता के बिना अस्तित्व संभव नहीं है. 

धीरेंद्र शास्त्री ने देश के मौजूदा हालातों पर चिंता जताते हुए एक कड़ी चेतावनी भी दी. न्होंने कहा कि यदि हिंदू समाज जातियों, भाषावाद और क्षेत्रवाद में बटा रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब भारत में भी वही हालात होंगे जो वर्तमान में बांग्लादेश में दिख रहे हैं. 

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एकता नहीं रही, तो ऐसी परिस्थितियां केवल सीमा पार ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश और हमारे छतरपुर जिले तक भी पहुंच सकती हैं. 

भारत माता की पूजन से हुए शुरुआत

बड़ा मलहरा के स्टेडियम में हुए इस हिंदू सम्मेलन की शुरुआत भारत माता के पूजन के साथ हुई। पं. शास्त्री ने मकर संक्रांति के त्योहार का उदाहरण देते हुए एकता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जैसे तिल अकेले का कोई अस्तित्व नहीं होता, लेकिन गुड़ के साथ मिलकर वह लड्डू बन जाता है, उसी प्रकार एकता से कोई भी शक्ति परास्त नहीं कर सकती।

जातिवाद को खत्म करने पर जोर

उन्होंने यह भी कहा कि यदि हमें अपनी संस्कृति और संस्कार बचाने हैं, तो जातियां भले ही रहें, लेकिन जातिवाद समाप्त होना चाहिए। उन्होंने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से एकजुट रहने का आह्वान किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक जसूदा सुमन, सहायक क्षेत्र प्रचारक प्रेम शंकर, सह प्रांत प्रचारक श्रवण और विभाग प्रचारक शिवेंद्र सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

admin

Related Posts

बलौदाबाजार में मरीन ड्राइव की तर्ज पर चौपाटी की शुरुआत

बलौदा बाजार. बलौदाबाजार में राजधानी रायपुर के मरीन ड्राइव की तर्ज पर चौपाटी की शुरआत हुईं जो इसे शहरी पहचान दिलाएगी। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरु…

नर्मदा नदी के घाटों पर तैयार होंगे पानी पर तैरते हुए अस्पताल

भोपाल. मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के घाटों पर फ्लोटिंग अस्पताल शुरू कर नदी एम्बुलेंस का विस्तार किया जाएगा। इससे घाट पर आने वाले तीर्थयात्रियों, परिक्रमावासियों, आगंतुकों और स्थानीय निवासियों…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

बसंत पंचमी और पीले रंग का गहरा संबंध: क्या है इसके पीछे की मान्यता?

बसंत पंचमी और पीले रंग का गहरा संबंध: क्या है इसके पीछे की मान्यता?

हनुमान से बजरंगबली तक: इस नाम के पीछे छिपी है अद्भुत और प्रेरक कहानी

हनुमान से बजरंगबली तक: इस नाम के पीछे छिपी है अद्भुत और प्रेरक कहानी

आज का राशिफल 20 जनवरी: ग्रहों की स्थिति से जानें दिन कैसा रहेगा

आज का राशिफल 20 जनवरी: ग्रहों की स्थिति से जानें दिन कैसा रहेगा

कब मनाई जाएगी बसंत पंचमी—22 या 23 जनवरी? तिथि, पूजा समय और विधि की पूरी जानकारी

कब मनाई जाएगी बसंत पंचमी—22 या 23 जनवरी? तिथि, पूजा समय और विधि की पूरी जानकारी

क्या आप सही तरीके से पढ़ते हैं हनुमान चालीसा? जानिए 10 जरूरी नियम और आम भूलें

क्या आप सही तरीके से पढ़ते हैं हनुमान चालीसा? जानिए 10 जरूरी नियम और आम भूलें

गरुड़ पुराण के अनुसार अंतिम संस्कार में 5 प्रकार के लोग नहीं कर सकते भागीदारी

गरुड़ पुराण के अनुसार अंतिम संस्कार में 5 प्रकार के लोग नहीं कर सकते भागीदारी