महाराष्ट्र में केसरिया तूफान: मुंबई-पुणे-नागपुर सब फतह, किसके नाम जाएगी ऐतिहासिक जीत?

मुंबई
महाराष्ट्र के निकाय चुनाव में भाजपा की प्रचंड लहर देखने को मिल रही है। देश के सबसे अमीर नगर निकाय बीएमसी में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जहां अब तक शिवसेना का दबदबा रहा करता था। 227 सीटों में से 158 के अब तक रुझान आए हैं और भाजपा अकेले ही 65 पर आगे। उसकी सहयोगी एकनाथ शिंदे की शिवसेना 18 पर आगे है, जबकि उद्धव सेना 52 पर आगे है। यह रुझान यदि नतीजों में बदले तो भाजपा की यह विक्ट्री ऐसी होगी कि हिस्ट्री रच दी जाएगी। ऐसा पहली बार होगा, जब बीएमसी में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी होगी। यहां की सत्ता में सबसे आगे रहने का उसका पुराना सपना रहा है, जो अब पूरा होता दिख रहा है।
 
इसी तरह नागपुर की बात करें को यहां भी भाजपा बेहद मजबूत होकर उभरी है। जिले के 151 वार्डों में से 94 पर अकेले भाजपा ही आगे है। अब तक 129 सीटों के ही रुझान सामने आए हैं। इसलिए माना जा रहा है कि कुल 151 सीटों के रुझान आने तक भाजपा अपने ही दम पर सेंचुरी लगा सकती है। वहीं भाजपा की सहयोगी एकनाथ शिंदे की शिवसेना को अब तक 2 सीटों पर ही बढ़त मिली है। आरएसएस के मुख्यालय वाले इस शहर में भाजपा के मुकाबले कोई दूर-दूर तक नहीं है और दूसरे नंबर वाली कांग्रेस महज 31 सीटों पर ही आगे है। इस तरह बीएमसी में ठाकरे परिवार का वर्चस्व खत्म होता दिख रहा है तो वहीं पुणे, नागपुर समेत कई शहरों में भाजपा का जलवा रहेगा।

ब्रांड फडणवीस होगा और मजबूत, गठबंधन में भी बढ़ेगी पावर
ऐसा ही हाल पुणे का भी है। पुणे में भाजपा फिलहाल 47 सीटों पर आगे है। उसके अलावा अन्य सभी दल मिलकर भी 22 सीटों पर ही आगे हैं। इस तरह अजित पवार और शरद पवार मिलकर भी भाजपा के आगे पस्त हैं। भाजपा की यह विक्ट्री हिस्ट्री रचने वाली है। यह जीत सीएम देवेंद्र फडणवीस का कद पार्टी में बढ़ा देगी। इसके अलावा गठबंधन के अंदर भी वह और मजबूत हो जाएंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि अजित पवार अलग लड़कर पराजित हो रहे हैं। इसके अलावा एकनाथ शिंदे की शिवसेना की रफ्तार भी सुस्त है। साफ है कि देवेंद्र फडणवीस का कद इससे बढ़ेगा और उनका ब्रांड मजबूत होगा।

ठाकरे ब्रदर्स हारते दिख रहे हैं अस्तित्व की लड़ाई, वर्चस्व पहले ही खत्म
यह चुनाव ठाकरे ब्रदर्स के लिए अस्तित्व के लिए संघर्ष वाला था, जिस लड़ाई को वह हारते दिख रहे हैं। अब आने वाले चुनावों में उद्धव सेना के लिए और मुश्किल होगा। ठाकरे परिवार की पावर पूरे महाराष्ट्र में कभी नहीं रही। लेकिन कुछ इलाकों में वह हमेशा मजबूत थी और इनमें मुंबई तो उसका गढ़ था। अब यहां की हार उसे गहरा दर्द देने वाली है।

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