पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में अयोध्या में सरयू नदी पर फ्लोटिंग पब्लिक बाथिंग कुंड का चल रहा निर्माण

अयोध्या को होली तक मिलेगा फ्लोटिंग पब्लिक बाथ कुंड का तोहफा

पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में अयोध्या में सरयू नदी पर फ्लोटिंग पब्लिक बाथिंग कुंड का चल रहा निर्माण

-25×15 मीटर के आधुनिक फ्लोटिंग स्ट्रक्चर में विकसित होगा स्नान कुंड परिसर

-मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन में अयोध्या विकास प्राधिकरण द्वारा धार्मिक पर्यटन को नई ऊँचाई देने का प्रयास

साढ़े तीन करोड़ का है प्रोजेक्ट, श्रद्धालु व पर्यटकों के लिए दो भव्य स्नान कुंड रहेंगे

-पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहन देने के लिए परिसर में 7 दुकानों की भी व्यवस्था

अयोध्या
भगवान राम की जन्मभूमि के रूप में विश्व प्रसिद्ध अयोध्या अब धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में एक और अनोखी पहल की ओर बढ़ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी विजन के तहत अयोध्या विकास प्राधिकरण द्वारा सरयू नदी पर आधुनिक फ्लोटिंग पब्लिक बाथिंग कुंड का निर्माण करा रहा है। उपाध्यक्ष अनुराग जैन ने बताया कि संभवतः फरवरी तक इसकी सौगात मिल जाएगी। लगभग होला तक इसके संचालित होने की संभावना जताई जा रही है। उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट की लागत तकरीबन साढ़े तीन करोड़ रुपए है। यह परियोजना धार्मिक श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुरक्षित, सुविधाजनक और आधुनिक स्नान की सुविधा प्रदान करेगी, जिससे अयोध्या का पर्यटन और भी आकर्षक बनेगा। श्री जैन ने बताया कि लिटमस मरीन इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड फ्लोटिंग बाथिंग कुंड का निर्माण कर रही है।

आधुनिक स्ट्रक्चर पर आधारित है फ्लोटिंग कुंड
यह फ्लोटिंग स्नान कुंड 25 मीटर × 15 मीटर के आधुनिक फ्लोटिंग स्ट्रक्चर पर आधारित होगा, जो पोंटून और उच्च-शक्ति वाले फाइबर सामग्री से निर्मित होगा। यह संरचना नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के अनुसार स्वचालित रूप से समायोजित हो सकेगी, जिससे हर मौसम में स्थिरता बनी रहेगी। 

दो स्नान कुंड, दस चेंजिंग रूम
परिसर में दो भव्य स्नान कुंड बनाए जा रहे हैं। प्रत्येक का आकार 15 मीटर × 4 मीटर। इनमें से एक पुरुषों के लिए और दूसरा महिलाओं के लिए होगा, ताकि गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। इसमें दस चेंजिंग रूम होंगे। पांच महिलाओं व पांच पुरुषों के लिए रहेंगे। सुरक्षा के मद्देनजर सेफ्टी बैरियर, रेलिंग, सोलर लाइट, बेंच और इमरजेंसी सपोर्ट बोट की व्यवस्था होगी। इसके अलावा, पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए परिसर में 7 दुकानें भी स्थापित की जाएंगी, जहां स्थानीय उत्पाद, पूजा सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध होंगी।

विदेशी पर्यटकों के लिए भी रहेगा आकर्षण
सरयू नदी में स्नान हिंदू परंपरा का अभिन्न अंग है। रामायण काल से ही इस नदी को पवित्र माना जाता है और यहां स्नान करने से पापों का नाश होता है। राम मंदिर के बाद लाखों-करोड़ों श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं। फ्लोटिंग बाथिंग कुंड जैसी आधुनिक सुविधा से न केवल देशी पर्यटक, बल्कि विदेशी पर्यटक भी आकर्षित होंगे। यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ नदी की स्वच्छता बनाए रखने पर भी जोर देती है, क्योंकि फ्लोटिंग संरचना से घाटों पर कचरा फैलने की संभावना कम होगी।

admin

Related Posts

अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति