पंचक आज आधी रात से प्रभावी, भूलकर भी ये शुभ कार्य किए तो हो सकता है नुकसान

हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में समय की गणना को बहुत महत्व दिया गया है. शुभ कार्यों के लिए जहां हम मुहूर्त देखते हैं, वहीं कुछ समय ऐसा भी होता है जिसे वर्जित माना गया है. ऐसा ही एक समय है पंचक. आज यानी 20 जनवरी की देर रात से पंचक शुरू हो रहे हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पंचक के दौरान कुछ विशेष कार्यों को करने से बचना चाहिए, क्योंकि माना जाता है कि इस दौरान किए गए अशुभ कार्य का प्रभाव पांच गुना बढ़ जाता है.

कब से कब तक है पंचक?

ज्योतिष गणना के अनुसार, इस बार पंचक की अवधि कुछ इस प्रकार रहेगी.

पंचक का आरंभ: 21 जनवरी 2026 (बुधवार) को रात 01:35 AM से (यानी आज 20 जनवरी की आधी रात के बाद).

पंचक का समापन: 25 जनवरी 2026 (रविवार) को दोपहर 01:35 PM पर.

चूंकि यह पंचक बुधवार से शुरू हो रहा है, इसलिए इसे ज्योतिष की भाषा में शुभ फल देने वाला राज पंचक भी कहा जाता है, लेकिन कुछ सावधानियां फिर भी जरूरी हैं.

क्या होता है पंचक?

जब चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों में विचरण करता है, तो उस काल को पंचक कहा जाता है. सरल शब्दों में कहें तो जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में होता है, तब पंचक लगता है. शास्त्रों के अनुसार, पंचक का अर्थ है ‘पांच’. ऐसी मान्यता है कि इस दौरान होने वाली कोई भी शुभ या अशुभ घटना पांच बार दोहराई जा सकती है.

पंचक में भूलकर भी न करें ये 5 काम

लकड़ी इकट्ठा करना: पंचक के दौरान ईंधन के लिए लकड़ी एकत्र करना या घास-फूस इकट्ठा करना अशुभ माना जाता है. इससे अग्नि का भय बना रहता है.

घर की छत डलवाना: अगर आप घर बनवा रहे हैं, तो ध्यान रखें कि पंचक के दौरान छत न डलवाएं. माना जाता है कि इससे घर में क्लेश और धन की हानि हो सकती है.

चारपाई या बेड बनवाना: पंचक काल में नया बेड, चारपाई बुनना या खरीदना शुभ नहीं माना जाता. यह सुख-शांति में बाधा उत्पन्न कर सकता है.

दक्षिण दिशा की यात्रा: दक्षिण दिशा को यम की दिशा माना गया है. पंचक के दौरान इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए, क्योंकि यह कष्टकारी हो सकती है.

अंतिम संस्कार में सावधानी: यदि पंचक के दौरान किसी की मृत्यु हो जाए, तो अंतिम संस्कार विशेष नियमों के साथ किया जाता है. शांति के लिए शव के साथ पांच पुतले बनाकर जलाए जाते हैं.

पंचक में क्या करें ?

क्या करें: आप पूजा-पाठ, नामकरण, और नियमित व्यापारिक कार्य कर सकते हैं. चूंकि यह राज पंचक है, इसलिए सरकारी कामकाज और संपत्ति के लेन-देन में सफलता मिलने के योग बनते हैं. बस ध्यान रखें कि ऊपर बताए गए पांच वर्जित काम न करें. मन में श्रद्धा रखें और किसी भी नए बड़े काम की शुरुआत से पहले अपने कुलदेवता का स्मरण जरूर करें.

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