यूपी दिवस विशेष: यूपी में अब पलायन नहीं, ‘परावर्तन’ का दौर

योगी सरकार के श्रम, रोजगार, निवेश और सामाजिक सुरक्षा मॉडल से बदली उत्तर प्रदेश की तस्वीर

युवाओं व श्रमिकों को अब रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए प्रदेश छोड़ने की मजबूरी नहीं

विकास, आत्मनिर्भरता और समावेशी समृद्धि की नई कहानी लिख रहा उत्तर प्रदेश

लखनऊ,

 उत्तर प्रदेश, जो कभी रोजगार के लिए पलायन करने वाले राज्यों में गिना जाता था, आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में रोजगार सृजन, औद्योगिक विकास और सामाजिक सुरक्षा का नया मॉडल प्रस्तुत कर रहा है। बीते पौने नौ वर्षों में योगी सरकार की नीतियों का असर अब जमीन पर साफ दिख रहा है। जहां पहले युवा और श्रमिक रोज़गार के लिए प्रदेश छोड़ने को मजबूर थे, अब उनके लिए घर के पास पर्याप्त अवसर मौजूद हैं। रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए प्रदेश छोड़ने की अब कोई मजबूरी नहीं। पूर्व में राज्य से बाहर जा चुके युवा व श्रमिक भी अब लौट रहे हैं। पलायन का स्थान 'परावर्तन' ने ले लिया है, जो प्रदेश में विकास, आत्मनिर्भरता और समावेशी समृद्धि की नई कहानी लिख रहा है।

रोजगार सृजन से लगा पलायन पर ब्रेक
योगी सरकार के कार्यकाल में औद्योगिक निवेश, एमएसएमई विस्तार, सेवायोजन मेलों और कौशल विकास योजनाओं के जरिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित हुए हैं। बेरोजगारी दर में ऐतिहासिक गिरावट आई है और लाखों युवाओं को सरकारी व निजी क्षेत्र में रोजगार मिला है। सेवायोजन विभाग द्वारा संचालित सेवामित्र पोर्टल पर 53 हजार से अधिक कुशल कामगार पंजीकृत हो चुके हैं, जिन्हें सीधे रोजगार से जोड़ा जा रहा है।

औद्योगिक निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर बने विकास की रीढ़
इन्वेस्ट यूपी के माध्यम से सिंगल विंडो सिस्टम, पारदर्शी प्रक्रियाओं और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' सुधारों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। एक्सप्रेसवे नेटवर्क, एयरपोर्ट्स, औद्योगिक कॉरिडोर, डिफेंस कॉरिडोर, मेडिकल कॉलेज और लॉजिस्टिक्स हब जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ने उद्योगों को जिलों तक पहुंचाया। उत्तर प्रदेश रोजगार और फैक्ट्री इकाइयों के मामले में देश के शीर्ष राज्यों में शामिल है, जिससे स्थानीय स्तर पर स्थायी नौकरियां बनी हैं। वर्तमान में प्रदेश में 30 हजार से अधिक फैक्ट्रियां संचालित हो रही हैं, जिनकी संख्या 2017 तक इसकी आधी भी नहीं थी। बीते पौने नौ सालों में युवाओं, श्रमिकों और महिलाओं के लिए उनके गृह जनपदों में रोजगार के अवसरों की संख्या कई गुना बढ़ी है।

श्रमिक कल्याण और सामाजिक सुरक्षा से मजबूत हुआ भरोसा
योगी सरकार ने केवल रोजगार ही नहीं, बल्कि श्रमिकों और उनके परिवारों की सुरक्षा, शिक्षा और भविष्य को भी प्राथमिकता दी है। पंजीकृत श्रमिकों के बच्चों और कोविड काल में निराश्रित हुए बच्चों के लिए हर मंडल में अटल आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। प्रत्येक विद्यालय में 100 बालक-बालिकाओं को आवासीय शिक्षा दी जा रही है।

दुर्घटना, मृत्यु और दिव्यांगता पर आर्थिक संबल
सरकार ने श्रमिकों के लिए मजबूत सुरक्षा कवच तैयार किया है। कार्यस्थल पर मृत्यु होने पर ₹5 लाख, स्थायी दिव्यांगता पर ₹3 लाख, आंशिक दिव्यांगता पर ₹2 लाख, पंजीकृत श्रमिक की दुर्घटना से मृत्यु पर ₹5 लाख, सामान्य मृत्यु पर ₹2 लाख, ₹25,000 अंत्येष्टि सहायता तथा अपंजीकृत श्रमिक की दुर्घटना/मृत्यु पर ₹1.25 लाख की सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इन प्रावधानों ने श्रमिकों की असुरक्षा को काफी हद तक खत्म किया है।

पेंशन, बैंकिंग और परिवार सुरक्षा योजनाएं
प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना, अटल पेंशन योजना, मातृत्व, शिशु एवं बालिका मदद योजना और निर्माण कामगार मृत्यु व दिव्यांगता सहायता योजना में लाखों लाभार्थी शामिल हैं। कन्या विवाह सहायता योजना के तहत दो बालिकाओं के विवाह पर ₹55,000 से ₹61,000 तक की सहायता दी जा रही है। इस सुरक्षा के चलते युवाओं में घर के पास ही रोजगार की भावना को बल मिला है। प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत राज्य में 9.52 करोड़ से अधिक बैंक खाते भी खोले जा चुके हैं। निर्माण कामगार गंभीर बीमारी सहायता योजना के अंतर्गत सरकारी अस्पतालों में इलाज की सौ फीसदी व्यय प्रतिपूर्ति की जा रही है। इससे श्रमिक परिवारों पर आर्थिक बोझ कम हुआ है और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उत्तर प्रदेश में ही मिल रही हैं।

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