विजय शाह के मामले पर सीएम का बड़ा बयान, दावोस दौरे के बाद होगा फैसला

भोपाल 

कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित बयान देने वाले मंत्री विजय शाह की मुश्किलें बढ़ती जा रहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने शाह के खिलाफ अभियोजन पर स्वीकृति देने के लिए सरकार को दो हफ्ते का वक्त दिया है। कानूनी जानकारों की मानें तो विजय शाह के इस केस का ट्रायल इंदौर एमपी-एमएलए कोर्ट में चल सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को अभियोजन पर फैसला लेने के लिए दो हफ्तों का वक्त दिया है। सीएम डॉ मोहन यादव 23 जनवरी तक स्विटजरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में शामिल होने के लिए गए हैं। ऐसे में सीएम के दावोस से लौटने के बाद विजय शाह के मामले में सरकार आगे निर्णय लेगी।

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई थी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में छह महीने बाद विजय शाह मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान विजय शाह की ऑनलाइन माफी पर सोमवार को कोर्ट ने कहा कि इसमें अब बहुत देर हो गई है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने पर 2 हफ्ते के भीतर फैसला लें।

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई कि राज्य सरकार विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट पर कई महीनों से कोई फैसला नहीं ले रही है। जबकि विशेष जांच दल ने अपनी जांच पूरी कर ली है और अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी है।

कोर्ट ने कहा- अब सरकार को फैसला लेना होगा सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश टिप्पणी करते हुए कहा- आप 19 अगस्त, 2025 से एसआईटी रिपोर्ट पर विचार कर रहे हैं। कानून आप पर दायित्व डालता है और आपको निर्णय लेना होगा। अब 19 जनवरी है।

अदालत ने एसआईटी की सीलबंद रिपोर्ट खोली और पाया कि अलग-अलग पहलुओं की जांच के बाद, उसने उसके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सरकार की मंजूरी मांगी है। कोर्ट ने कहा-

हमें सूचित किया गया है कि मामला यहां लंबित होने के कारण राज्य द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है। हम मध्य प्रदेश राज्य को कानून के अनुसार मंजूरी हेतु उचित कदम उठाने का निर्देश देते हैं।

कोर्ट ने माफी पर कहा- अब बहुत देर हो चुकी इससे पहले मप्र सरकार की ओर से यह बताया गया था कि उसने एसआईटी के अनुरोध पर कोई कार्रवाई नहीं की थी क्योंकि मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित था।

जब शाह का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने बताया कि उन्होंने पहले ही अपनी टिप्पणियों के लिए माफी मांग ली थी, तो अदालत ने कहा, "माफी कहां है? रिकॉर्ड में तो कुछ भी नहीं है। अब तो बहुत देर हो चुकी है।"

एमपी हाईकोर्ट ने FIR दर्ज करने के आदेश दिए थे सुप्रीम कोर्ट में वकील वरुण ठाकुर ने बताया कि विजय शाह द्वारा कर्नल सोफिया को लेकर दिए गए बयान के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान (सुओ मोटो) लेते हुए एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि एफआईआर किस तरह दर्ज की जाए।

इसके बाद विजय शाह ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी (विशेष अनुमति याचिका) दायर की। उन्होंने कोर्ट में यह दलील दी कि बयान देने का उनका इरादा गलत नहीं था। उन्होंने माफी भी मांगी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब माफी के लिए बहुत देर हो चुकी है और उनका बयान शपथ के विपरीत है।

SIT रिपोर्ट में विजय शाह के पुराने बयानों का जिक्र इस मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत कर दी है। रिपोर्ट में न केवल मौजूदा घटना को शामिल किया गया, बल्कि जय ठाकुर द्वारा दायर एक याचिका का भी उल्लेख किया गया, जिसमें विजय शाह के पुराने बयानों का जिक्र था।

सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी को निर्देश दिया था कि वह इन सभी घटनाओं और बयानों की जांच करे और रिपोर्ट दाखिल करे। एसआईटी की जांच के बाद चार्जशीट दाखिल कर दी गई है, लेकिन फिलहाल कोर्ट संज्ञान (कॉग्निज़ेंस) नहीं ले पा रहा है। इसकी वजह यह है कि मध्य प्रदेश सरकार अपने मौजूदा मंत्री के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति नहीं दे रही है।

मामले की सुनवाई फरवरी के पहले सप्ताह में होगी सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर अभियोजन की मंजूरी देने का निर्देश दिया है। इस मामले की सुनवाई फरवरी के पहले सप्ताह में होगी। ऐसे में विजय शाह की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, क्योंकि यह एक संवेदनशील बयान था और जिस समय यह दिया गया, उस वक्त माहौल भी बेहद संवेदनशील था।

हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। एसआईटी ने जांच के बाद अपराध मानते हुए चार्जशीट दाखिल कर दी है। अब राज्य सरकार को यह तय करना है कि मामले में आगे अभियोजन चलाया जाए या नहीं।

पहले भी कई विवादित बयान दे चुके हैं विजय शाह मंत्री विजय शाह पहले भी कई विवादित बयान दे चुके हैं। तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान की पत्नी को लेकर एक बयान के कारण उन्हें पद छोड़ना पड़ा था। हाल ही में उन्होंने रतलाम जिले में लाड़ली बहनों को लेकर भी एक बयान दिया था। जिसके बाद कांग्रेस नेता उनका विरोध करते हुए पद से हटाने की मांग कर रहे हैं।

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