दोस्त बनकर डसते हैं! इन 5 आदतों वाले लोगों से रहें सावधान, वरना पछतानी पड़ेगी पूरी जिंदगी

जीवन में एक अच्छा दोस्त मिल जाए तो काफी चीजें आसान हो जाती हैं। कभी खुशी हो तो दोस्त उसे दोगुना कर देते हैं तो वहीं कभी कोई दुख हो, तो अपने कंधे का सहारा दे देते हैं। एक अच्छा और सच्चा दोस्त मिलना वाकई नसीब की बात है क्योंकि ऐसे लोगों की कमी नहीं जो मुंह पर तो आपके दोस्त, आपके शुभचिंतक बनते हैं लेकिन उनसे बुरा शायद ही कोई आपके बारे में सोचता हो। ऐसे दोगले लोगों से दोस्ती करने से लाख गुना बेहतर है कि आप जीवनभर बिना दोस्त के ही गुजार दें। आचार्य चाणक्य ने जीवन के हर महत्वपूर्ण पहलू पर विस्तार से लिखा, जिसमें से एक दोस्ती भी है। उन्होंने अपनी नीति में ऐसे लोगों का जिक्र किया है, जिनसे दोस्ती करना खुद को विष देने के समान है। आचार्य ने इन लोगों की कुछ आदतों के बारे बताया है और इनसे कोसों दूर रहने की भी सलाह दी है। आइए जानते हैं इन लोगों की पहचान कैसे करें।

हमेशा मन में जलन और ईर्ष्या की भावना रखने वाले

कुछ लोगों का स्वभाव ऐसा होता है कि वो आपके सामने तो आपकी खूब तारीफ करते हैं और ऐसा दिखाते हैं जैसे मानों उनसे बेहतर आपके लिए कोई सोचता ही ना हो। लेकिन पीठ पीछे ये आपके बारे में जहर उगलते हैं। इनके मन में आपको ले कर हमेशा एक जलन और ईर्ष्या की भावना बनी रहती है। जीवन में आपको आगे बढ़ते देखना इन्हें भीतर से जलाकर राख कर देता है तो वहीं आपके दुख में ये मन ही मन बहुत खुश होते हैं। आचार्य चाणक्य के अनुसार ऐसे लोग कभी भी आपके दोस्त नहीं बन सकते। अगर आपको कभी भी लगे कि सामने वाला आपसे ईर्ष्या करता है तो उससे दोस्ती करना अवॉइड करें।

हमेशा नेगेटिव सोचने वाले लोग

कहते हैं कि आप जैसे लोगों के बीच रहते हैं, खुद भी वैसे ही बन जाते हैं। खासतौर से आपके दोस्तों का नजरिया, जीवन को लेकर उनके विचार, उनके लक्ष्य; ये सभी चीजें कहीं ना कहीं आप पर भी बहुत असर डालती हैं। ऐसे में दोस्तों का चुनाव बहुत ही सोच समझकर करना चाहिए। आचार्य चाणक्य के अनुसार ऐसे लोगों की संगत में भूलकर भी ना रहें जो हमेशा हर चीज को ले कर नकारात्मक सोच रखते हों। ये लोग ना तो खुद जीवन में कुछ कर पाते हैं और ना ही आपको आगे बढ़ने देते हैं।

जो बन जाते हों हर किसी के दोस्त

एक कहावत तो आपने भी कभी ना कभी सुनी ही होगी कि जो सभी के दोस्त होते हैं, असल में वो किसी के भी दोस्त नहीं होते। ये बात बिल्कुल सच है और आपको अपने जीवन में लागू भी जरूर करनी चाहिए। खासतौर से कभी ऐसे व्यक्ति को तो अपना करीबी मित्र बिल्कुल नहीं बनाना चाहिए जो हर किसी के साथ वैसा ही व्यवहार करता हो, जैसा आपके साथ करता है। असल में ये लोग किसी के सगे नहीं होते। अपनी सहूलियत के हिसाब से इनकी दोस्ती गहरी और हल्की होती रहती है। समय आने पर हो सकता है ये आपकी चुगली करने और आपके राज खोलने में भी परहेज ना करें। ऐसे में बेहतर है कि आप इनसे दोस्ती करें ही ना।

मुसीबत में ना दे साथ

कहते हैं कि अच्छे दोस्त की पहचान मुसीबत में ही होती है। जो सिर्फ आपके अच्छे पलों में आपका साथ दे और मुसीबत आते ही सबसे दूर खड़ा नजर आए, ऐसे लोगों को दोस्त तो क्या अपने आसपास भी नहीं रखना चाहिए। आचार्य चाणक्य ने भी अपनी नीतियों में ऐसे लोगों से दूरी बनाकर रखने को कहा है। अगर आपको कभी भी लगे कि आपका कोई दोस्त कभी आपकी मदद करने को तैयार नहीं होता, मदद मांगने पर हमेशा आनाकानी करता है और दूर हो जाता है; तो इसे नजरअंदाज ना करें। कल को जब आपको इनकी वाकई सबसे ज्यादा जरूरत होगी ये उस समय भी हाथ खड़े करते हुए ही नजर आएंगे।

दुष्ट स्वभाव के व्यक्ति से ना करें दोस्ती

आचार्य चाणक्य के अनुसार अगर कभी सांप और दुष्ट व्यक्ति में से किसी एक को चुनना हो तो सांप ही बेहतर है। क्योंकि सांप एक बार ही डसता है, वहीं दुष्ट व्यक्ति बार-बार डसता है। आचार्य कहते हैं कि दुष्ट स्वभाव वाले व्यक्ति से भूलकर भी दोस्ती ना करें। इनके साथ रहने पर आपका पूरा जीवन बर्बाद हो सकता है। अगर आपको लगता है कि भविष्य में ये सुधार जाएंगे या इनके व्यवहार में बदलाव आ जाएगा, तो यह सोचना व्यर्थ है क्योंकि एक दुष्ट मनुष्य कभी भी अपने स्वाभाव को नहीं बदलता है।

 

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