राम मंदिर शिखर का धर्म ध्वज सात महाद्वीपों तक पहुंचेगा, ऐतिहासिक संकल्प लिया गया

अयोध्या 
 धर्म नगरी अयोध्या से सनातन संस्कृति और प्रभु श्रीराम की भक्ति को वैश्विक मंच तक पहुंचाने की एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायी पहल शुरू हो चुकी है. राम मंदिर के शिखर पर स्थापित होने वाला पवित्र धर्म ध्वज अब केवल अयोध्या तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे दुनिया के सातों महाद्वीपों तक ले जाकर फहराने का संकल्प लिया गया है. इस विशेष अभियान की विधिवत शुरुआत अयोध्या में पूजा अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ की गई, जिसने इसे आध्यात्मिक के साथ साथ सांस्कृतिक आंदोलन का स्वरूप दे दिया है.

अयोध्या में विधिविधान से हुआ अभियान का शुभारंभ
राम जन्मभूमि अयोध्या में हुए इस आयोजन के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा अर्चना के साथ धर्म ध्वज यात्रा का शुभारंभ किया गया. यह वही ध्वज है जो राम मंदिर के शिखर पर स्थापित होगा और अब उससे पूर्व पूरी दुनिया में सनातन धर्म की पहचान का संदेश लेकर निकलेगा. आयोजन में संत समाज और श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस पहल को और भी पवित्र और ऐतिहासिक बना दिया.

नरेंद्र कुमार कर रहे हैं नेतृत्व
इस वैश्विक अभियान का नेतृत्व हरियाणा के हिसार निवासी और प्रसिद्ध पर्वतारोही नरेंद्र कुमार कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि यह धर्म ध्वज केवल एक कपड़ा या प्रतीक नहीं, बल्कि सनातन धर्म, प्रभु श्रीराम और भारतीय संस्कृति के मूल्यों का प्रतिनिधित्व करता है. उनका लक्ष्य है कि वर्ष 2026 के अंत तक इस पवित्र ध्वज को विश्व के सभी सात महाद्वीपों पर फहराया जाए, ताकि राम और सनातन संस्कृति का संदेश हर कोने तक पहुंचे.

नेपाल से शुरू हुआ पहला चरण
नरेंद्र कुमार के अनुसार इस यात्रा का पहला चरण नेपाल से शुरू किया गया. 21 दिसंबर को यात्रा की शुरुआत हुई और 29 दिसंबर को नेपाल में संबंधित महाद्वीप पर धर्म ध्वज फहराया गया. इसके बाद अब चरणबद्ध तरीके से अन्य महाद्वीपों की यात्रा की जाएगी. यह पूरी पहल अयोध्या से शिखर तक निकाली जा रही धर्म ध्वज यात्रा के रूप में आयोजित की जा रही है, जो अपने आप में एक अनूठा धार्मिक अभियान है.

धार्मिक के साथ सामाजिक उद्देश्य भी
राम मंदिर के शिखर पर लगने वाला यह धर्म ध्वज अब पूरी दुनिया में सनातन धर्म की पहचान बनेगा. इस अभियान का उद्देश्य केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक भी है. नरेंद्र कुमार का मानना है कि आज का युवा वर्ग भौतिकवाद की दौड़ में अपनी सांस्कृतिक जड़ों से दूर होता जा रहा है. इस यात्रा के माध्यम से युवाओं को धर्म, संस्कार और भारतीय मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है.

श्रीराम के आदर्शों का वैश्विक संदेश
इस यात्रा का मूल उद्देश्य प्रभु श्रीराम के जीवन चरित्र और आदर्शों को वैश्विक स्तर पर पहुंचाना है. नरेंद्र कुमार का कहना है कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जीवन आज भी समाज को त्याग, कर्तव्य, मर्यादा और सत्य का मार्ग दिखा सकता है. अयोध्या में संपन्न हुई पूजा अर्चना के बाद यह धर्म ध्वज यात्रा अब अंतरराष्ट्रीय स्वरूप ले चुकी है. आने वाले समय में जब यह ध्वज सातों महाद्वीपों पर फहराएगा, तब पूरी दुनिया में राम मंदिर और सनातन संस्कृति की भक्ति का संदेश गूंजेगा.

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