राजस्थान-झुंझुनू में भाजपा में प्रत्याशी चयन की बड़ी चुनौती

झुंझुनू.

झुंझुनू हमेशा से ही कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है। पिछली बार सात सीटों में से 5 पर कांग्रेस ने जीत हासिल की थी, वहीं दो सीटें भाजपा के खाते में गई थीं। यह सीट राजस्थान विधानसभा की महत्वपूर्ण सीट मानी जाती है। जाट और मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र होने से दोनों ही समुदाय चुनाव को प्रभावित करते हैं। वर्तमान में उनके बेटे बृजेंद्र ओला इस सीट से विधायक थे। अब उनके सांसद बनने से सीट खाली हो गई है।

2023 के विधानसभा चुनाव में यहां से 10 प्रत्याशियों ने ताल ठोंकी थी, लेकिन मुख्य मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी के बीच ही रहा था, जिसमें कांग्रेस प्रत्याशी बृजेन्द्रसिंह ओला ने भारतीय जनता पार्टी के बबलू चौधरी उर्फ निश्चित कुमार को 27 हजार 572 हजार वोटों के मार्जिन से हराया था।

भाजपा इस बार किस पर खेलेगी दांव
इस बार भी भाजपा के लिए यह सीट जीतना बड़ी चुनौती है। बृजेन्द्र ओला यहां जीत की हैट्रिक लगा चुके हैं। कई चुनावों मे भाजपा यहां खाता भी नहीं खोल पाई है। अब इस बार भाजपा किस मजबूत प्रत्याशी पर दांव खेलती है, ये देखना दिलचस्प होगा। हालांकि 2018 मे राजेंद्र भांबू निर्दलीय के रूप में मैदान में थे, जिन्हें 41 हजार से ज्यादा वोट मिले थे, वहीं लगातार सक्रिय रहने से भाजपा ने बबलू चौधरी पर विश्वास जताया था।

कुल कितने वोटर
2023 के चुनाव में झुंझुनू सीट पर कुल 2 लाख 68 हजार 613 वोटर्स थे, जिसमें 1 लाख 40 हजार 142 पुरुष वोटर्स तो महिला वोटर्स की संख्या 1 लाख 28 हजार 765 थी। इसमें कुल 1 लाख 91 हजार 381 वोट पड़े, इनमें से कांग्रेस के बृजेन्द्र सिंह ओला को 84,582 वोट मिले तो वहीं भाजपा से बबलू चौधरी उर्फ निश्चित कुमार के खाते में 57,010 वोट आए। ओला ने 27,572 मतों के अंतर से यह मुकाबला जीता था।

सामाजिक और आर्थिक ताना-बाना
झुंझुनू सीट पर हमेशा से ही कांग्रेस का दबदबा रहा है। भाजपा और कांग्रेस से दोनों के लिए ही मैदान में जाट समुदाय के उम्मीदवार को उतारना बेहद सुरक्षित रहता है लेकिन यहां मुस्लिम वोटर्स की भी अच्छी-खासी संख्या है। मुस्लिम वोट कांग्रेस के परंपरागत वोट माने जाते हैं लेकिन इस बार राजेंद्र गुढ़ा की एंट्री से भाजपा के लिए राजपूत समाज और कांग्रेस के लिए मुस्लिम और एससी-एसटी समाज में सेंध लगने की संभावनाएं बढ़ती नजर आ रही हैं। चुनावों में जीत का बिगुल बजाने के लिए भाजपा के सामने फिलहाल बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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