राजस्थान-जोधपुर में पहली महिला तेजस फाइटर पायलट बनीं मोहना सिंह

जोधपुर/जयपुर.

स्क्वाड्रन लीडर मोहना सिंह, भारत की पहली महिला फाइटर पायलटों में से एक जिन्होंने अब एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वह अब भारत के 'मेड इन इंडिया' एलसीए तेजस फाइटर जेट के 18 'फ्लाइंग बुलेट्स' स्क्वाड्रन में शामिल होने वाली पहली महिला फाइटर पायलट बन गई हैं। यह कदम भारतीय वायुसेना में महिलाओं के लिए एक बड़ी सफलता है।

हाल ही में जोधपुर में 'तरंग शक्ति' नामक एक अभ्यास हुआ, जिसमें मोहना सिंह ने तीनों सेनाओं के उप प्रमुखों के साथ उड़ान भरी। इस दौरान उन्होंने सेना और नौसेना के उप प्रमुखों को तेजस जेट में उड़ान भरने से पहले सभी जरूरी निर्देश दिए और उनकी मदद की। बता दें कि मोहना सिंह, भावना कांत और अवनी चतुर्वेदी भारतीय वायुसेना की पहली महिला फाइटर पायलट्स के समूह का हिस्सा थीं। अब मोहना एलसीए तेजस जेट उड़ा रही हैं, जबकि उनकी साथी Su-30 MKI लड़ाकू विमान उड़ा रही हैं। यह अभ्यास भारत की 'मेक इन इंडिया' पहल को बढ़ावा देने के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मोहना सिंह ने कुछ दिनों पहले जोधपुर में हुए अभ्यास ‘तरंग शक्ति’ में भाग लिया था. जहां वो तीनों सेनाओं के तीन उप प्रमुखों द्वारा किए गए ऐतिहासिक उड़ान का हिस्सा थीं.इस दौरान उन्होंने सेना और नौसेना के उप प्रमुखों को तेजस जेट में उड़ान भरने से पहले सभी जरूरी निर्देश दिए और उनकी मदद की. उनके इस कारनामे के बाद उन्हें ‘फ्लाइंग बुलेट्स’ स्क्वाड्रन में शामिल करने का फैसला लिया गया. मोहना सिंह की इस सफलता महिला सशक्तीकरण के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित किया है.

तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने तेजस में भरी उड़ान

बता दें कि बीते दिनों भारतीय वायु सेना, थल सेना और नौसेना के उप प्रमुखों ने जोधपुर में आयोजित किए गए हवाई अभ्यास के दौरान स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान (एलएसी) तेजस में उड़ान भरी। अधिकारियों ने बताया कि वायुसेना के उप प्रमुख एयर मार्शल ए.पी.सिंह ने मुख्य लड़ाकू विमान उड़ाया, जबकि थल सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एन.एस.राजा सुब्रमणि और नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने दो सीट वाले विमान में उड़ान भरी। ‘हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड’ (एचएएल) द्वारा निर्मित तेजस विमान हवाई युद्ध और आक्रामक हवाई सहायता मिशनों के लिए एक ताकतवर विमान है, जबकि इसकी मदद किसी स्थान का सैनिक सर्वेक्षण और जहाज-रोधी अभियान को भी संचालित किया जा सकता है। 

हिलाओं के लिए कायम की मिसाल

मोहना सिंह भारत की पहली महिला लड़ाकू पायलटों में से एक हैं. वे भारतीय वायु सेना में लड़ाकू धारा में शामिल की गई तीन महिला पायलटों में से एक थीं. मोहना सिंह, उन तीन फ्लाइट लेफ्टिनेंटों में से एक थीं, जिन्होंने ‘नारी शक्ति पुरस्कार-2020’ जीता था. मोहना सिंह के इस कारनामे ने महिलाओं के लिए मिसाल कायम कर दी है.

बता दें कि मोहना सिंह, भावना कांत और अवनी चतुर्वेदी भारतीय वायुसेना की पहली महिला फाइटर पायलट्स हैं. वहीं अब इन तीनों में से मोहना सिंह को एलसीए तेजस जेट उड़ाने का मौका मिलेगा. ये अभ्यास भारत की ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बढ़ावा देने के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

admin

Related Posts

अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति