क्रिस्टी गिलमोर को हराकर मालविका क्वार्टर फाइनल में

चांग्झू (चीन)
भारत की युवा बैडमिंटन खिलाड़ी मालविका बंसोड ने शानदार फॉर्म बरकरार रखते हुए ऊंची रैंकिंग वाली क्रिस्टी गिलमोर को हराकर चाइना ओपन सुपर 1000 टूर्नामेंट के क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया। विश्व रैंकिंग में 43वें स्थान पर काबिज मालविका ने दो बार की राष्ट्रमंडल खेल स्वर्ण पदक विजेता और स्कॉटलैंड की 25वीं रैंकिंग वाली गिलमोर के खिलाफ एक घंटे पांच मिनट तक चले मुकाबले में 21-17 19-21 21-16 से जीत दर्ज की।

जीत के बाद मालविका ने कहा, ‘‘मै पहली बार किसी सुपर 1000 टूर्नामेंट का क्वार्टर फाइनल खेलूंगी। यह सपना सच होने जैसा है और अब तक कैरियर की सबसे बड़ी उपलब्धि है।’’ इससे एक दिन पहले मालविका ने पेरिस ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता ग्रेगोरिया मारिस्का को हराया था। मालविका टूर्नामेंट में अकेली भारतीय खिलाड़ी बची हैं। अब उनका सामना दो बार की विश्व चैम्पियन चौथी वरीयता प्राप्त जापान की अकाने यामागुची से होग।

 

  • admin

    Related Posts

    AUS vs PAK क्लैश: विश्व कप वार्म-अप में कौन दिखाएगा असली दम?

    नई दिल्ली टी20 विश्व कप से पहले ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान के बीच 3 मैच की सीरीज गुरुवार से शुरू हो रही है। इसके जरिए पाकिस्तानी टीम को विश्व कप की…

    तारीफ कम पड़ेगी — अभिषेक शर्मा ने पावर हिटिंग में क्रिस गेल को छोड़ा पीछे, कैफ का बड़ा बयान

    नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व बल्लेबाज मोहम्मद कैफ ने युवा सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा की प्रशंसा करते हुए कहा है कि वह निरंतरता के साथ आक्रामक बल्लेबाजी के…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    धर्म

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति