मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हरियाणा में बाबा मस्तनाथ की समाधि पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए

भोपाल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज हरियाणा प्रवास के दौरान आज रोहतक में सिद्ध शिरोमणि बाबा मस्तनाथ की समाधि स्थल पहुंचकर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा मस्तनाथ यूनिवर्सिटी का भ्रमण कर विश्वविद्यालय के विभिन्न प्रभागों का अवलोकन भी किया।

उल्लेखनीय है कि नाथ संप्रदाय का भारतीय संस्कृति एवं समाज में महत्वपूर्ण योगदान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस पावन स्थल पर पहुंचकर उन्हें संतोष हुआ है। नाथ संप्रदाय ने जाति, मत और भाषा का कभी अनादर नहीं किया, सभी को पूर्ण सम्मान दिया है और सबको जोड़ने का प्रयास किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बाबा मस्तनाथ मठ (आश्रम) के पदाधिकारियों ने स्वागत किया और बाबा मस्तनाथ की लघु प्रतिमा भी स्मृति चिन्ह के रूप में भेंट की।

 

admin

Related Posts

अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति