बांग्लादेश के जेशोरेश्वरी मंदिर से मां काली का मुकुट हुआ चोरी, पीएम मोदी ने किया था भेंट, घटना पर भारत सख्त

ढाका
बांग्लादेश के जेशोरेश्वरी मंदिर से मां काली का मुकुट चोरी हो गया है। चांदी का बना सोने की परत वाला यह मुकुट भारत के पीएम नरेंद्र मोदी ने मंदिर को गिफ्ट किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2021 में जब बांग्लादेश गए थे तो उन्होंने जेशोरेश्वरी मंदिर का दौरा भी किया था। इस दौरान उन्होंने ये मुकुट भेंट किया था। उपहार में दिया गया देवी काली का ये मुकुट कथित तौर पर चोरी हो गया है। इस घटना पर भारत ने सख्त रुख दिखाया है। ढाका में भारतीय उच्चायोग ने बयान जारी करते हुए इस पर चिंता जताई है। उच्चायोग ने मुकुट को बरामद करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।

बांग्लादेशी अखबार द डेली स्टार के मुताबिक, मंदिर के पुजारी और सफाई कर्मचारियों ने पाया कि देवी काली के सिर से मुकुट गायब है। बांग्लादेशी पुलिस ने चोरी की पुष्टि करते हुए जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि अपराधी की पहचान करने के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाली जा रही है और जल्दी ही चोर को पकड़ लिया जाएगा।

जेशोरेश्वरी मंदिर की हिन्दुओं में मान्यता

पीढ़ियों से मंदिर की देखभाल कर रहे परिवार की सदस्य ज्योति चट्टोपाध्याय ने बांग्लादेशी मीडिया को बताया कि मुकुट चांदी से बना था और उस पर सोने की परत चढ़ी थी। पीएम नरेंद्र मोदी ने मार्च 2021 में जेशोरेश्वरी मंदिर को मुकुट भेंट करते हुए मंदिर में एक बहुउद्देश्यीय सामुदायिक हॉल का निर्माण करने का भी ऐलान किया था।

जेशोरेश्वरी मंदिर की बांग्लादेश के अलावा भारत और दूसरे पड़ोसी देशों में भी काफी मान्यता है। ये भारत के साथ-साथ पड़ोसी देशों में फैले 51 शक्तिपीठों में से एक के रूप में प्रतिष्ठित है। यह मंदिर, भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल, ईश्वरीपुर, सतखिरा में स्थित है। माना जाता है कि इसका निर्माण 12वीं शताब्दी में हुआ था।

अल्पसंख्यकों के पूजा स्थलों की सुरक्षा पर सवाल

बांग्लादेश में देवी का मुकुट चोरी होने का ये मामला ऐसे समय हुआ है, जब देश में धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा सवालों के घेरे में है। इस साल अगस्त में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों की एक श्रंखला देखी गई है। हालांकि मौजूदा चोरी में अभी तक इस तरह के किसी एंगल की बात पुलिस ने नहीं की है।

51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है जेशोरेश्वरी मंदिर
पीढ़ियों से मंदिर की देखभाल करने वाले परिवार के सदस्य ज्योति चट्टोपाध्याय ने बांग्लादेशी मीडिया को बताया कि यह मुकुट चांदी से बना था और इस पर सोने की परत चढ़ी हुई थी। चोरी हुआ मुकुट भक्तों के लिए सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व रखता है। हिंदू पौराणिक कथाओं में, जेशोरेश्वरी मंदिर को भारत और पड़ोसी देशों में फैली 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।

 

ऐसा है मंदिर का इतिहास
माना जाता है कि सतखीरा के ईश्वरीपुर में स्थित इस मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में अनारी नामक ब्राह्मण ने करवाया था। उन्होंने जशोरेश्वरी पीठ के लिए 100 दरवाजों वाला मंदिर बनवाया था। बाद में 13वीं शताब्दी में लक्ष्मण सेन ने इसका जीर्णोद्धार करवाया और अंततः राजा प्रतापादित्य ने 16वीं शताब्दी में मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया। अपनी बांग्लादेश यात्रा के दौरान, पीएम मोदी ने कहा था कि भारत मंदिर में एक बहुउद्देशीय सामुदायिक हॉल का निर्माण कराएगा। उन्होंने कहा कि यह स्थानीय लोगों के लिए सामाजिक, धार्मिक और शैक्षिक आयोजनों के लिए उपयोगी होगा और साथ ही, यह चक्रवात जैसी आपदाओं के समय सभी के लिए आश्रय का काम भी करेगा।

admin

Related Posts

हवाई हादसों का दर्दनाक इतिहास: अजित पवार दुर्घटना से पहले इन 11 दिग्गजों की भी ऐसे ही हुई थी मौत

नई दिल्ली बुधवार की सुबह महाराष्ट्र और देश की राजनीति के लिए गहरे शोक की खबर लेकर आई, जब महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार और चार अन्य लोगों की एक…

हमें पता है क्या हो रहा है — UGC रेगुलेशन मामले में दखल देगा सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली जातिगत भेदभाव से जुड़े UGC के नए नियमों के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है। शीर्ष न्यायालय ने बुधवार को इस…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति