किशोरकुमार की पुण्यतिथि पर फूलों से महक उठी उनकी समाधि, दूध जलेबी का लगाया भोग

 खंडवा

किशोर कुमार की पुण्यतिथि पर रविवार को उनका समाधि स्थल मधुर गीतों से गूंज उठा। सुरों की महफिल ऐसी सजी की जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारी तक खुद को गाने से नहीं रोक पाए। महापौर अमृता यादव, कलेक्टर अनूप कुमार सिंह और एसपी मनोजकुमार राय ने किशोर दा को स्वारांजलि दी।

यहां महाराष्ट्र, कोलकाता सहित अन्य मध्य प्रदेश से भी किशोर प्रशंसक आए और उन्होंने अपने अंदाज में किशोर कुमार को गीतों से श्रद्धांजलि दी। सुबह दस बजे से किशोर कुमार की समाधि पर गीतों की प्रस्तुति शुरू हो गई थी। यहां नगर निगम ने किशोर कुमार की समाधि को फूलों से सजाया। उन्हें दूध जलेबी का भोग भी लगाया। इधर शहर में भी अलग अलग क्षेत्रों में किशोर कुमार के प्रशंसकों ने आयोजन किए।

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा किशोर कुमार अलंकरण समारोह आज शहर में आयोजित किया जाएगा। इस विशेष आयोजन में फिल्म निदेशक राजकुमार हिरानी को अलंकरण से सम्मानित किया जाएगा। किशोर कुमार की पुण्यतिथि पर होने वाले इस आयोजन में पार्श्व गायक नीरज श्रीधर आर्केस्ट्रा के साथ गीतों की प्रस्तुति देंगे।

किशोन नाइट कार्यक्रम
पुलिस लाइन ग्राउंड पर शनिवार को किशोर कुमार अलंकरण की तैयारी को अंतिम रूप दिया गया। यहां आयोजन के लिए मंच तैयार किया गया है। वहीं, आयोजन स्थल पर करीब 500 से अधिक लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है। रविवार को शाम सात बजे यहां किशोर नाइट कार्यक्रम की शुरुआत होगी।

इसी कार्यक्रम में फिल्म निदेशक और पटकथा लेखक राजकुमार हिरानी को किशोर कुमार अलंकरण दिया जाएगा। संस्कृति विभाग की ओर से जारी आमंत्रण पत्र में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव का नाम भी उल्लेखित किया गया है। हालांकि जिला प्रशासन के पास मुख्यमंत्री के आगमन की अधिकृत सूचना शनिवार रात्रि तक नहीं आई थी।

कैबिनेट मंत्री विजय शाह ने शनिवार को मीडिया से चर्चा में कहा कि हरफनमौला किशोर कुमार का अपनी जन्मभूमि से प्रेम था। वे हमेशा कहा करते थे, दूध जलेबी खाएंगे खंडवा में बस जाएंगे। उन्होंने अपना अंतिम संस्कार भी खंडवा में ही किए जाने की इच्छा जताई थी।

दुनिया का पहला ऐसा बेहतरीन और बड़ा कलाकार होगा। जिसकी जन्मभूमि और समाधि खंडवा में है। हम सौभाग्यशाली है। शाह ने कहा कि 2004 में जब मैं संस्कृति मंत्री था तो मैंने किशोर कुमार अलंकरण खंडवा में शुरू कराया। पहले भोपाल में यह समारोह होता था। मैंने तात्कालीन मुख्यमंत्री से कहा कि सम्मान खंडवा में दिया जाना चाहिए।

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