रामराज्य की अवधारणा से महर्षि वाल्मीकि ने कराया समाज को अवगत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

महर्षि वाल्मीकि ने प्रत्येक व्यक्ति के रोम-रोम तक भगवान श्रीराम की भावना को पहुंचाया: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

रामराज्य की अवधारणा से महर्षि वाल्मीकि ने कराया समाज को अवगत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महर्षि वाल्मीकि जयंती पखवाड़े का किया शुभारंभ

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने  क्षेत्र वाल्मीकि धाम में महर्षि वाल्मीकि जयंती पखवाड़े का शुभारंभ किया। उल्लेखनीय है 17 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा एवं महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर एक पखवाड़े तक विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

इस अवसर पर राज्य सभा सांसद बालयोगी उमेशनाथ जी महाराज, प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव, महापौर मुकेश टटवाल, बहादुर सिंह बोरमुंडला, विवेक जोशी, संजय अग्रवाल, रवि सोलंकी, संभागायुक्त संजय गुप्ता, कलेक्टर नीरज कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा, एवं अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद थे ।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह हम सब का सौभाग्य है कि 17 अक्टूबर से लेकर 21 अक्टूबर तक महर्षि वाल्मीकि जयंती के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। बालयोगी उमेशनाथ जी महाराज राज्यसभा सांसद के लिए नामांकित हुए हैं । उन्होंने पूरे उज्जैन को गौरवान्वित किया है। हमारे समाज में राम राज्य की संपूर्ण भावना महर्षि वाल्मीकि ने प्रस्तुत की है। उन्होंने राम राज्य को परिभाषित किया और भारतीय संस्कृति और सभ्यता के पूरे रोम-रोम और वायुमंडल तक महर्षि वाल्मीकि ने भगवान श्रीराम को पहुंचाया है। हमारे समाज में संत जन स्वयं जलकर हमारी प्रगति के मार्ग को आलोकित करते हैं । भारतीय संस्कृति और सभ्यता में संत जनों का विशेष महत्व है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपनी ओर से सभी को महर्षि वाल्मीकि जयंती की शुभकामनाएं दीं ।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सर्वप्रथम वाल्मीकि धाम पहुंचकर स्वामी सोहन दास जी महाराज की समाधि पर पुष्प अर्पित किए तथा समाधि पर माथा टेका। इसके बाद उन्होंने आश्रम में धूनी के स्थान के दर्शन भी किये ।

महर्षि वाल्मीकि के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। उज्जैन उत्तर के विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने स्वागत भाषण दिया। सांसद बाल योगी उमेश नाथ जी महाराज ने कहा कि प्रतिवर्ष शरद पूर्णिमा के अवसर पर महर्षि वाल्मीकि जयंती का आयोजन किया जाता है। उन्होंने एक पखवाड़े तक विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किए जाने का सुझाव मुख्यमंत्री के समक्ष रखा तो उन्होंने कहा कि यह अत्यंत हर्ष का विषय है और इस प्रकार के आयोजन निरंतर किये जाते रहना चाहिए।

बालयोगी उमेश नाथ जी महाराज ने कहा कि प्रधानमंत्री ने सभी वर्गों का विश्वास अर्जित किया है। यह देश ऋषि मुनियों का देश रहा है। हर समाज में संतों का जन्म हुआ है। हम सब मिलकर महर्षि वाल्मीकि जयंती मना रहे हैं। एक पखवाड़े पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। रामायण के अनुसार जहां पुष्पक विमान उतरा था वहां पर महर्षि वाल्मीकि इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाया गया। इसके लिए वाल्मीकि समाज सदैव देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ऋणी रहेगा। प्रधानमंत्री द्वारा अंतिम व्यक्ति के लोगों को प्रथम पंक्ति में लेकर आने का अद्वितीय व अतुलनीय प्रयास किया गया है।

बालयोगी उमेश नाथ जी महाराज ने कहा कि आगामी 21 अक्टूबर को महर्षि वाल्मीकि जयंती पखवाड़े का समापन भोपाल में भव्य स्तर पर आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर संजय कोरट, जितेंद्र भाटी , सत्यनारायण खोईवाल एवं अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद थे।

 

admin

Related Posts

अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति