मुख्यमंत्री डॉ. यादव गोवर्धन पूजा के पर्व पर तिलकेश्वर गौ-सेवा सदन पहुंचे

मुख्यमंत्री डॉ. यादव गोवर्धन पूजा के पर्व पर तिलकेश्वर गौ-सेवा सदन पहुंचे

गोवर्धन पूजा कर गौ-माता की सेवा की

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को गोवर्धन पूजा के पर्व पर ग्रामोद्योग विकास मंडल द्वारा संचालित तिलकेश्वर गौ-सेवा सदन पहुंचे। यहाँ वे अनाज एवं तिलहन व्यापारी संघ के द्वारा आयोजित गोवर्धन पूजा और दिवाली मिलन समारोह में शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सर्वप्रथम गोवर्धन पूजा कर गौ-माता की पूजा की तथा उन्हें 56 प्रकार का भोग चारे में मिलाकर खिलाया। इसके पश्चात मुख्यमंत्री ने तिलकेश्वर महादेव का पूजन-अर्चन किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि अवंतिका की इस पावन धरती पर परमात्मा की विशेष कृपा है। यहां तिल भर भी जमीन बाकी नहीं है, जहां धर्म की सत्ता नहीं है। पूरे साल हम लोग त्यौहार मनाते रहें, परमात्मा की कृपा हम सब पर बनी रहे। घनघोर अंधकार के बीच दीप का एक प्रकाश ही दिपावली है। यह उजाला देती है, प्रकाश देती है, हिम्मत देती है, ऊष्मा देती है, ऊर्जा देती है और लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। मुख्यमंत्री ने सभी को दिवाली की शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जन्म से लेकर मृत्यु तक लगातार उत्सव और पर्व के आयोजन के लिए हमारी भारतीय संस्कृति जानी जाती है। इसी के साथ जीने के लिए लगातार ललक बढ़ती है। जीवन में कितने ही कष्ट हों लेकिन उनके बीच रोज हमें मुस्कुराने को मिलता है। जब हम प्रकृति के साथ जुड़ते हैं, परमात्मा के साथ जुड़ते हैं, गौ-माता के साथ जुड़ते हैं तो हमें आनंद प्राप्त होता है। गौ-माता में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है। इनकी पूजा और सेवा करके हम अपना जीवन सफल बनाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गौ-माता अपने आंचल से हमको जीवन देती है यह प्रकृति के समान हमको जीना सिखाती है। यह हमको भी पालती है,अपने बच्चों को भी पालती है। हमें दूध देती है। हमारी संस्कृति की विशेषता है कि हम सबको नमस्कार करते हैं। हमें अपने देशी गौ-वंश की रक्षा करनी चाहिए। हमारे सारे तीज त्यौहार समाज को जोड़ने का काम करते हैं। जमुना जी के किनारे भगवान कृष्ण का भी मंदिर बनाएंगे। हर विधानसभा क्षेत्र में दो से तीन गौ-शालाएं बनाई जाएंगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नगर निगम द्वारा 5000 गायों की क्षमता वाली गौ-शाला उज्जैन में बनाई जाएगी। तिलकेश्वर महादेव सिंहस्थ क्षेत्र का प्रमुख मंदिर है, जिसका जीर्णोद्धार किया जाएगा, साथ ही यहां की गौ-शाला का भी विकास किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वीर दुर्गादास की छतरी के पास ब्रिज बनाया जाएगा। मुल्लापुरा से लेकर चंदू खेड़ी तक सिक्स लेन रोड़ बनाया जाएगा। कालिदास उद्यान से काल भैरव मंदिर तक फोर-लेन किया जाएगा।

इस अवसर पर सांसद बालयोगी उमेशनाथ जी महाराज, अनिल फिरोजिया, प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल , विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, महापौर मुकेश टटवाल, नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव, तिलकेश्वर गौ सेवा समिति के सचिव विश्वास शर्मा, दिनेश जैन, संदीप कुलश्रेष्ठ, सेवा धाम आश्रम के सुधीर भाई गोयल, मुन्ना सरकार, बहादुर सिंह बोरमुंडला, जीतेन्द्र अग्रवाल, तिलकेश्वर गौ-शाला के अध्यक्ष प्रदीप जैन, कलेक्टर नीरज कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

 

  • admin

    Related Posts

    अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

    अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

    मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

    रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    धर्म

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति