राजस्थान में जगह-जगह हुई गोवर्धन पूजा, धूम-धाम से मनाया पर्व

भीलवाड़ा
हर बार की तरह इस बार भी दीपावली के बाद कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में गोवर्धन पूजा और अन्नकूट प्रसादी का आयोजन हुआ। राजस्थान के भीलवाड़ा में गाय के गोबर से बनाए गोवर्धन की पूजा और अन्नकूट बनाकर गायों की पूजा कर खुशहाली की कामना की गई।

राजस्थान के भीलवाड़ा के कई घरों में महिलाएं शनिवार सुबह को गोवर्धन पूजा में जुटी रहीं। पूजा कर रही एक गृहिणी सुशीला देवी ने बताया कि दीपावली पर्व के दूसरे दिन कार्तिक पूर्णिमा के शुक्ल पक्ष को गोवर्धन पूजा की जाती है। ये मान्यता तब से चल रही है, जब से श्रीकृष्ण भगवान ने गोकुल वासियों को इंद्र भगवान की जगह गोवर्धन पर्वत की पूजा करने को कहा। पूजा को लेकर महिलाएं गोबर से भगवान गोवर्धन बनाने के साथ ही गाय की पूजा में जुट गईं। कई मंदिरों में आज ही अन्नकूट महोत्सव मनाया जाता है।

भीलवाड़ा में जगह जगह महिलाएं पूजन अर्चन में जुटी दिखीं। सबने धार्मिक महत्व बताया। स्थानीय महिला ने बताया, ऐसी मान्यता है कि इंद्र के कोप से हो रही वर्षा से गोकुल वासियों की रक्षा के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी दिव्य शक्ति से विशाल गोवर्धन पर्वत को छोटी अंगुली पर उठाया था। तभी से गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाती है।

इंद्र को जब पता चला कि कृष्ण ही भगवान विष्णु के अवतार हैं, तब उन्होंने उनसे माफी मांगी, इसके बाद श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पूजा के लिए कहा और इसे अन्नकूट पर्व के रूप में मनाया जाने लगा। वेदों के अनुसार, इस दिन वरुण, इंद्र, अग्नि की पूजा की जाती है। साथ में गायों का श्रृंगार करके उनकी आरती की जाती है और उन्हें फल मिठाइयां खिलाई जाती हैं।

राजस्थान में गोवर्धन पूजा को बड़ी श्रद्धाभक्ति के साथ मनाया जाता है। परम्परानुसार गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की प्रतिकृति बनाई जाती है। इसके बाद उसकी फूल, धूप, दीप, नैवेद्य से उपासना की जाती है। इस दिन एक ही रसोई से घर के सभी सदस्य का भोजन बनता है। भोजन में विविध प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं। सुबह के वक्त शरीर पर तेल मलकर स्नान करने और घर के मुख्य द्वार पर गाय के गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाने, गोबर का गोवर्धन पर्वत बनाकर ग्वाल बाल, पेड़ पौधों की आकृति बनाने का विधान है।

मध्य में भगवान कृष्ण की मूर्ति भी कई जगह रखी जाती है इसके बाद भगवान कृष्ण, ग्वाल-बाल,और गोवर्धन पर्वत का पूजन कर उन्हें पकवान और पंचामृत का भोग लगाया जाता है। पूजा के दौरान महिलाएं गोवर्धन पूजा की कथा सुनती हैं।

 

admin

Related Posts

अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति