रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में 14 एवं 15 नवंबर को होगा राज्य स्तरीय आयोजन

रायपुर

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में 14 एवं 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती-जनजातीय गौरव दिवस पर राज्य स्तरीय भव्य आयोजन किया जायेगा। दो दिवसीय आयोजित इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ सहित 17 राज्यों के आदिवासी नर्तक दल मनमोहक प्रस्तुतियां देंगे। इनमें अरूणाचल प्रदेश के आदि लोक नृत्य नाटिका, मध्यप्रदेश के भील भगोरिया नृत्य, मेघालय के गारो लोक नृत्य और नागालैण्ड के आओ नागा लोक नृत्य सहित विभिन्न आकर्षक प्रस्तुतियां होगी।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 15 नवंबर को जमुई (बिहार) से जनजातीय गौरव दिवस का शुभारंभ करेंगे। वे छत्तीसगढ़ में आयोजित कार्यक्रमों में वर्चुंअली शामिल होंगे और पीएम जनमन योजना में शामिल जिलों के हितग्राहियों से चर्चा भी करेंगे। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में भी एक दिवसीय गौरव दिवस का आयोजन किया जायेगा।

आदिम जाति विभाग द्वारा इसकी तैयारियां की जा रही हैं। साइंस कॉलेज मैदान में जनजातीय गौरव दिवस के दौरान 14 एवं 15 नवंबर को पूर्वान्ह 11 बजे से लेकर रात्रि 8 बजे तक जनजातीय गौरव पर आधारित विविध कार्यक्रमों का आयोजन होगा, जिसमें विषय विशेषज्ञ सहित कई राज्यों के आदिवासी कलाकार, आदिवासी कला संस्कृति के मर्मज्ञ शामिल होंगे।  दो दिवसीय राज्य स्तरीय जनजातीय गौरव दिवस के आयोजन को भव्य एवं यादगार बनाने के लिए आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा देश के विभिन्न राज्यों से आदिवासी नर्तक दलों एवं कलाकारों को विशेष रूप से आमंत्रित किया जा रहा है। अब तक 18 राज्यों के 22 आदिवासी नर्तक दलों ने इस दो दिवसीय आयोजन में शामिल होने के लिए अपनी सहमति दी है, जिसमें अरूणांचल प्रदेश, मिजोरम, नागालैण्ड, मेघालय, आसाम, त्रिपुरा, उत्तराखण्ड, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, राजस्थान सहित अन्य राज्यों के आदिवासी नर्तक दल शामिल हैं। इनमें पुरूष एवं महिला कलाकारों की संख्या लगभग 425 है।

प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने बताया कि 14 नवंबर एवं 15 नवंबर को साइंस कॉलेज मैदान में संध्या 3 बजे से अंतर्राज्यीय लोक नर्तक दलों के सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति के साथ-साथ जनजातीय गौरव से संबंधित विषयों पर संगोष्ठी का आयोजन तथा जनजातीय जीवन शैली पर चित्रकला का प्रदर्शन भी होगा।

 

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