मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के साथ डाला वोट, कहा-लोकतंत्र के पर्व को मनाकर मजबूत करें

रांची
आज यानी बुधवार को झारखंड की 43 सीटों पर मतदान जारी है। इसके चलते मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के साथ वोट करने पहुंचे। दोनों ने अपने मताधिकार का प्रयोग करते हुए वोट डाला।

इस दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड की जनता से अपील करते हुए कहा है कि आज लोकतंत्र का पर्व है। आज हम लोगों ने अपने-अपने मतदान केंद्र में जाकर के अपने मतों का प्रयोग किया और मैं राज्य के हर एक नागरिक से अपील करता हूं कि लोकतंत्र के इस महापर्व को, इस व्यवस्था को और मजबूत करें। वर्षों बरस से चलने वाली इस लोकतंत्र के पर्व को हमें मनाना चाहिए और मजबूत करना चाहिए।

बता दें कि झारखंड विधानसभा चुनाव के 43 सीटों पर सुबह 7 बजे से ही मतदान जारी है। भारी संख्या में लोग मतदान केंद्र में जाकर मतदान कर रहे हैं। साथ ही अलग-अलग पार्टी के नेता भी सुबह से ही मतदान करने में जुटे हुए हैं।

admin

Related Posts

अजित पवार की मौत पर सियासत तेज: ममता बोलीं– सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो जांच, भरोसा खत्म

कोलकाता महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता अजित पवार का बुधवार सुबह एक दुखद विमान दुर्घटना में निधन हो गया। यह हादसा पुणे जिले के…

‘अयोध्या से कटियार ही लड़ें’— बृजभूषण शरण सिंह का बड़ा बयान, सियासत में साजिश का आरोप

गोंडा कैसरगंज के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा है कि अयोध्या लोकसभा सीट पर पहला हक विनय कटियार का है और उन्हें ही चुनाव लड़ना चाहिए। उन्होंने यह…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति