खजुराहो शिल्पग्राम : एक भारत श्रेष्ठ भारत भारत पर आधारित हुआ रानी दुर्गावती पर संगीत नाट्य मंचन….

 खजुराहो

 पर्यटन नगरी खजुराहो के दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र खजुराहो स्थित मुक्तकाशी मंच से रानी दुर्गावती पर आधारित सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र (सीसीआरटी) द्वारा वीरांगना रानी दुर्गावती की 500वीं जयंती को समर्पित "कुशल रानी दुर्गावती" शीर्षक एक नाट्य श्रद्धांजलि एवं सीसीआरटी छात्रवृत्तिधारकों और युवा कलाकारों द्वारा "एक भारत श्रेष्ठ भारत" विषय पर नृत्य-संगीत प्रस्तुति का शिल्पग्राम, खजुराहो में 13 नवंबर 2024 को प्रदर्शन किया गया ।

 भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय का एक स्वायत्त संगठन सीसीआरटी वीरांगना रानी दुर्गावती की 500वीं जयंती के उपलक्ष्य में "कुशल वीरांगना रानी दुर्गावती" शीर्षक से एक प्रेरणादायी नाट्य प्रस्तुति का आयोजन कर रहा है।  सीसीआरटी छात्रवृत्तिधारकों और युवा कलाकारों द्वारा “एक भारत श्रेष्ठ भारत” विषय पर नृत्य-संगीत प्रस्तुति भी इसी आयोजन का एक हिस्सा है। यह कार्यक्रम बुधवार, 13 नवंबर 2024 को शिल्पग्राम, खजुराहो (म.प्र.) में दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, नागपुर के सहयोग से आयोजित किया जाएगा। इस नाटक की संकल्पना और निर्देशन सीसीआरटी, नई दिल्ली के अध्यक्ष डॉ. विनोद नारायण इंदुरकर ने किया है, जो रानी दुर्गावती की विरासत को एक सादर श्रद्धांजलि है।

यह नाट्य प्रस्तुति रानी दुर्गावती के असाधारण जीवन और उनकी धरोहर को समर्पित है। 16वीं शताब्दी की इस वीरांगना और गोंड साम्राज्य की रानी ने अपने अदम्य साहस और अद्वितीय पराक्रम से इतिहास में एक अमिट छाप छोड़ी है। मुगल बादशाह अकबर के नेतृत्व में शत्रु सेना के आक्रमणों के खिलाफ अपने राज्य की रक्षा के लिए उनकी निर्णायक भूमिका अपनी जनता की भलाई और संप्रभुता के प्रति उनके अडिग समर्पण का प्रतीक है। घोर कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अपनी सेना का वीरतापूर्वक नेतृत्व किया और अपनी आखिरी सांस तक असाधारण साहस और शौर्य का प्रदर्शन किया। यह नाटक उनके जीवन के अल्पज्ञात पहलुओं को सामने लाने का प्रयास करता है, जिसमें उनकी अटूट इच्छाशक्ति, रणनीतिक कुशलता और अपने राज्य के प्रति असीम निष्ठा को दर्शाया गया है। उनकी साहसिक कथा को मंच पर लाकर उनके अमर व्यक्तित्व को सम्मानित करने और उनके अडिग संकल्प से दर्शकों को प्रेरित करने का प्रयास किया गया है।

इस विशेष आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में  संस्कृति मंत्रालय में पदासीन अपर सचिव एवं वित्तीय सलाहकार सुरंजना चोपड़ा आईएएस को आमंत्रित किया गया है। साथ ही सुअमिता प्रसाद सरभाई आईआरएएस संयुक्त सचिव  संस्कृति मंत्रालय ( प्रदर्शन  कलाएं , एसएंडएफ , बीटीआई और क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र ) इस आयोजन की विशिष्ट अतिथि हैं । इस प्रस्तुति के दौरान इस नाटक के निर्देशक और सीसीआरटी के अध्यक्ष डॉ विनोद नारायण इंदुरकर तथा इसके निर्माण प्रमुख और सीसीआरटी के निदेशक राजीव कुमार आईआरएस भी मौजूद रहेंगे ।इस आयोजन के बारे में अपने विचार करते हुए डॉ. विनोद नारायण इंदुरकर कहते हैं कि , “हमें यह नाट्य प्रस्तुति पेश करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है जो महान रानी दुर्गावती को हमारी सच्ची श्रद्धांजलि है।

यह नाटक उनके अदम्य साहस को नमन करता है और उनकी अमिट धरोहर की याद दिलाता है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगी।” सुरंजना चोपड़ा ने इस आयोजन को देश के महानायकों-नायिकाओं की विरासत को जीवंत बनाए रखने की एक सराहनीय पहल बताया और उम्मीद जताई कि ऐसे और भी समर्पित कार्यक्रमों के माध्यम से सीसीआरटी आगे भी देश की युवा पीढ़ी को हमारे विलक्षण अतीत के बारे में शिक्षित और प्रेरित करता रहेगा । सुअमिता प्रसाद सरभाई ने इस आयोजन को भारत के सुनहरे इतिहास और शास्त्रीय नृत्य – संगीत के संरक्षण , संवर्धन और प्रोत्साहन की महत्वपूर्ण पहल बताया और भविष्य में भी ऐसे रोचक कार्यक्रमों के आयोजन के प्रति सीसीआरटी और संस्कृति मंत्रालय की प्रतिबद्धता दोहराई ।

शिल्पग्राम, खजुराहो (म.प्र.) में आयोजित यह कार्यक्रम भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और गौरवशाली इतिहास का उत्सव होगा, जो रानी दुर्गावती की अविस्मरणीय यात्रा और राष्ट्र के प्रति उनके अपार योगदान को प्रदर्शित करेगा। सीसीआरटी सभी देशभक्त कलाप्रेमियों को भारत की महान वीरांगना रानी दुर्गावती की शाश्वत वीरगाथा के इस यादगार समारोह में शामिल होने के लिए हार्दिक आमंत्रण देता है , साथ ही "एक भारत श्रेष्ठ भारत" विषय पर सीसीआरटी छात्रवृत्तिधारकों और युवा कलाकारों की बहुरंगी-बहुआयामी नृत्य-संगीत प्रस्तुति का भी हिस्सा बनने का अवसर प्रदान करता है।
आज के इस संगीतमय नाट्य प्रस्तुति को देखने के लिए बड़ी संख्या में देसी – विदेशी पर्यटकों के अलावा स्थानीय व क्षेत्रीय जन  बड़ी संख्या में उपस्थित रहे, जिन्होंने तालियां बजाकर इस सुंदर प्रस्तुति को सराहा ।

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