84 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए सरोद वादक आशीष खान

मुंबई

मनोरंजन जगत से हाल ही में एक बुरी खबर सामने आई है। मशहूर सरोद वादक आशीष खान अब इस दुनिया में नहीं रहे। उनका 84 साल की उम्र में निधन हो गया है। दिग्गज वादक ने अमेरिका के लॉस एंजिल्स में अपनी जिंदगी की आखिरी सांस ली। आशीष के निधन की खबर से उनके चाहने वालों का बड़ा सदमा लगा है और वे दिवंगत को सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि देते नजर आ रहे हैं।

आशीष खान के भतीजे, उस्ताद शिराज अली खान ने सोशल मीडिया पर  सरोद वादक के निधन की पुष्टि की है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर लिखा- 'बहुत दुख के साथ हम आपको शुक्रवार, 14 नवंबर, 2024 को हमारे श्रद्धेय और प्रिय आशीष खान के निधन की जानकारी देते हैं। हम उन्हें अपनी जिंदगी में पाकर धन्य हो गए हैं और वो हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे।'

बता दें, आशीष खान का जन्म 1939 में एक संगीत परिवार में हुआ था। उनके दादा उस्ताद अलाउद्दीन खान और पिता उस्ताद अली अकबर खान भी एक बेहतरीन सरोद वादक थे। इसलिए ये गुण भी आशीष खान ने अपने बाप-दादा से लिया था। उन्होंने छोटी उम्र से ही भारतीय शास्त्रीय संगीत की ट्रेनिंग शुरू कर दी थी।

  • admin

    Related Posts

    कभी मां के साथ बासी खाना खाने वाली भारती सिंह आज नैनी को देती हैं महंगे तोहफे

    मुंबई भारती सिंह का एक प्यारा सा वीडियो इस वक्त इंटरनेट पर खूब सुर्खियों में है। इस वीडियो में वो अपने बच्चों की नैनी रूपा दी को उनके बर्थडे पर…

    ऋचा चड्ढा नॉन-फिक्शन ट्रैवल और कल्चर सीरीज़ को करेंगी प्रोड्यूस

      मुंबई, बॉलीवुड अभिनेत्री और निर्माता ऋचा चड्ढा एक नए और रोमांचक प्रोजेक्ट के साथ अपनी क्रिएटिव दुनिया को आगे बढ़ा रही हैं। ऋचा चड्ढा एक नॉन-फिक्शन सीरीज़ को प्रोड्यूस…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    धर्म

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति