राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम अंतर्गत 100 दिवसीय नि-क्षय शिविर का आयोजन 7 दिसम्बर से

भोपाल

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि टीबी, जिसे कभी लाइलाज माना जाता था, अब सघन और समर्पित प्रयासों से समाप्ति के करीब है। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम को और प्रभावी बनाने के लिए 7 दिसंबर 2024 से 25 मार्च 2025 तक "100 दिवसीय निक्षय शिविर" आयोजन किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य टीबी उन्मूलन के प्रयासों को और अधिक गति देना और जन-जागरूकता को बढ़ावा देना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अभियान का वर्चुअल शुभारंभ करेंगे।

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने स्वास्थ्य कर्मियों और आमजन से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जैसे हमने कोविड महामारी में एकजुट होकर हर व्यक्ति तक जाँच और उपचार सुनिश्चित किया, वैसे ही इन 100 दिनों में हमें टीबी की व्यापक स्तर पर स्क्रीनिंग, जाँच, उपचार और जन-जागरूकता को सुनिश्चित करना है। उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों से आह्वान किया कि पूर्ण समर्पण से अभियान को सफल बनाने के लिए अपना योगदान दें। उन्होंने आमजन से स्वास्थ्य कर्मियों को सहयोग प्रदान करने की अपील की है, जिससे समाज का सशक्त और स्वस्थ भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।

100 दिवसीय नि-क्षय शिविर अंतर्गत गतिविधियाँ

प्रदेश में क्षय रोग (टी.बी.) के उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 100 दिवसीय नि-क्षय शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह अभियान प्रदेश के 23 उच्च-प्राथमिकता वाले जिलों नरसिंहपुर, दतिया, सिंगरोली, डिन्डौरी, खण्डवा, कटनी, अनुपपूर, अलिराजपुर जबलपुर, नीमच, रतलाम, मंदसौर, छतरपुर, उज्जैन, सीधी, श्योपुर, बैतूल, छिन्दवाडा, विदिशा, दमोह, मंडला, सीहोर और सिवनी में 7 दिसंबर से प्रारंभ होगा। इस शिविर का उद्देश्य उच्च जोखिम वाले मरीजों की स्क्रीनिंग, जांच, और उचित उपचार प्रदान करना है। इस अभियान के अंतर्गत समस्त आयुष्मान आरोग्य मंदिर (उपस्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, शहरी/ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र, और मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक) के माध्यम से उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों और टी.बी. के मरीजों की स्क्रीनिंग एवं जांच की जाएगी।

100 दिवसीय नि-क्षय शिविर के तहत विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों और जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इसमें प्रमुख रूप से मधुमेह पीड़ित, कुपोषित, धूम्रपान करने वाले, शराब सेवन करने वाले, पूर्व टीबी मरीज, संपर्क व्यक्ति और एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों की जानकारी जुटाई जाएगी। शिविरों का आयोजन प्रमुख सार्वजनिक स्थानों जैसे रेलवे और बस स्टेशनों, सामूहिक स्थानों, छात्रावास, आयुष्मान आरोग्य मंदिर (AAM), और स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों पर किया जाएगा। नि-क्षय शिविरों का आयोजन कारखानों, उद्योगों, ईंट भट्टों, निर्माण स्थलों, पत्थर क्रशरों और अन्य ऐसे कार्यस्थलों पर भी किया जाएगा, जिससे श्रमिक वर्ग और अन्य संवेदनशील वर्गों तक इस अभियान का लाभ पहुँच सके।

शिविरों का आयोजन पंचायत संस्थाओं, शहरी स्थानीय निकायों, स्वसहायता समूहों, जन आरोग्य समिति, महिला आरोग्य समिति, और ग्राम स्वास्थ्य पोषण एवं स्वच्छता समिति के साथ मिलकर जागरूकता कार्यक्रम चलाया जायेगा। नए निक्षय मित्रों और टीबी चैंपियंस/विजेताओं की पहचान की जाएगी, जिससे उनकी सहभागिता से अभियान को और गति दी जा सके। त्यौहारों और मेलों के दौरान धार्मिक गुरुओं के माध्यम से जागरूकता संदेश प्रसारित किए जाएंगे। स्कूलों और कॉलेजों में कला और सांस्कृतिक गतिविधियाँ, रैलियाँ आयोजित की जाएंगी। स्वास्थ्य विभाग के अलावा अन्य सरकारी विभागों में "नि-क्षय सप्ताह" के आयोजन के अन्तर्गत जागरूकता सत्र, निक्षय शिविर, टीबी शपथ एवं प्रतियोगिताएँ भी आयोजित की जाएंगी।

 

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