जयशंकर ने भारत के रूस से तेल खरीदने के फैसले का जोरदार बचाव किया, कहा-रूस नहीं देता है सस्ता तेल

नई दिल्ली
रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद पश्चिमी देशों ने रूस का बहिष्कार किया, लेकिन भारत ने अपनी दोस्ती बरकरार रखी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में रूस की यात्रा की। साथ ही भारत ने रूस से तेल खरीदना जारी रखा। इसको लेकर जब विदेश मंत्री एस जयशंकर से सवाल पूछे गए तो उन्होंने करारा जवाब दिया। जयशंकर ने भारत के रूस से तेल खरीदने के फैसले का जोरदार बचाव किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या विश्व के पास भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कोई बेहतर विकल्प है। यह बयान उन्होंने 22वें दोहा फोरम के पैनल "नए युग में संघर्ष समाधान" पर चर्चा के दौरान दिया। जयशंकर ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के तीन साल बाद दुनिया यह महसूस करने लगी है कि इस समस्या को केवल वार्ता के माध्यम से सुलझाया जा सकता है।

रूस से तेल खरीदने पर भारत का रुख
जयशंकर ने स्पष्ट किया कि रूस से तेल खरीदना भारत के लिए कोई सस्ता सौदा नहीं है, बल्कि यह देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की एक आवश्यकता है। उन्होंने कहा, "मैं तेल खरीदता हूं। यह सच है। यह सस्ता नहीं है। क्या आपके पास बेहतर डील है?" भारत ने हाल के वर्षों में रूस से कच्चे तेल के आयात में उल्लेखनीय वृद्धि की है। रूस अब भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बन चुका है, जो भारत के कुल तेल आयात का 35 प्रतिशत से अधिक हिस्सा रखता है।

रूस-यूक्रेन संघर्ष पर भारत की भूमिका
जयशंकर ने कहा कि भारत का हमेशा मानना रहा है कि यह युद्ध युद्धभूमि पर नहीं सुलझ सकता है। उन्होंने कहा कि अंततः दोनों पक्षों को वार्ता की मेज पर लौटना होगा और भारत इसे संभव बनाने के लिए हर प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा, "हम मास्को जाते हैं तो राष्ट्रपति पुतिन से बात करते हैं। जब कीव जाते हैं तो राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की से मिलते हैं। हम दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति के सूत्र तलाशने की कोशिश करते हैं।"हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत कोई शांति योजना पेश नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा, "हम मध्यस्थता नहीं कर रहे। हम बातचीत कर रहे हैं और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि दोनों पक्षों को पूरी पारदर्शिता से जानकारी दी जाए।"

यूक्रेन और भारत के संबंध
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल की शुरुआत में कीव का दौरा किया और राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की से मुलाकात की। पीएम मोदी ने भारत के शांति के पक्ष में रहने की प्रतिबद्धता दोहराई। दूसरी ओर ज़ेलेंस्की ने भारत से यूक्रेन का समर्थन करने और संतुलनकारी रवैया न अपनाने की अपील की। दोहा फोरम में जयशंकर ने संकेत दिया कि वैश्विक राजनीति में यथार्थवाद की ओर रुख हो रहा है। उन्होंने कहा, "वार्ता की आवश्यकता को स्वीकार करना युद्ध जारी रखने की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण हो रहा है।"

admin

Related Posts

हवाई हादसों का दर्दनाक इतिहास: अजित पवार दुर्घटना से पहले इन 11 दिग्गजों की भी ऐसे ही हुई थी मौत

नई दिल्ली बुधवार की सुबह महाराष्ट्र और देश की राजनीति के लिए गहरे शोक की खबर लेकर आई, जब महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार और चार अन्य लोगों की एक…

हमें पता है क्या हो रहा है — UGC रेगुलेशन मामले में दखल देगा सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली जातिगत भेदभाव से जुड़े UGC के नए नियमों के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है। शीर्ष न्यायालय ने बुधवार को इस…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति