गुरुवार को करें ये काम, जीवन में कभी भी दुर्भाग्य दस्तक नहीं देगा

बृहस्पतिवार का दिन देवगुरु बृहस्पति और भगवान श्री हरि विष्णु को बहुत प्रिय है। इन दिन कुछ खास नियमों को अपने जीवन का हिस्सा बनाने से बेइंतहा उन्नति और खुशियां प्राप्त की जा सकती हैं। सबसे शुरुआत करते हैं नहाने के पानी से इसमें चुटकी भर हल्दी डालें। फिर स्वच्छ होने के बाद हल्दी अथवा केसर का तिलक अपने मस्तक, कंठ और नाभि पर लगाएं। ऐसा करने से गुरु ग्रह के सारे दोष खत्म हो जाएंगे। गुरुवार को देवगुरु बृहस्पति और भगवान श्रीहरि विष्णु का व्रत रखने वाले व्यक्ति के जीवन में कभी भी दुर्भाग्य दस्तक नहीं देता।

डाइनिंग टेबल पर या ग्रुप में बैठकर भोजन करते हों तो दिशाओं पर ध्यान न दें, पर घर के मुखिया या विशेष मेहमान का मुंह पूर्व दिशा में अवश्य होना चाहिए एवं वह स्थान कभी खाली नहीं रहना चाहिए। स्वामी के अभाव में उस ग्रुप में जो प्रमुख हो, वह वहां बैठे।

घर के मंदिर में कभी भी ऐसी मूर्तियां न रखें जो खंडित या टूटी अवस्था में हों।

किचन और शौचालय कभी भी आमने-सामने नहीं होने चाहिएं। किचन के दरवाजे के सामने चूल्हा नहीं होना चाहिए, इससे वास्तु दोष होता है। बाथरूम ईशान कोण की किसी भी दीवार से लगा हुआ नहीं होना चाहिए।

  • admin

    Related Posts

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बताया गया है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। मान्यता है कि एकादशी के दिन विधि-विधान से…

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है. जब प्रदोष व्रत शुक्रवार के दिन पड़ता है, तो इसे शुक्र प्रदोष कहा जाता है. यह व्रत न केवल भगवान शिव…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    धर्म

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति