शांति सहरिया का अब अपना घर है, पक्की सड़क भी है, पानी की समस्या भी हो गई खत्म

भोपाल
'उसने अपनी जिंदगी में कभी ऐसे दिन भी देखे, जब उसके उदर में अन्न का दाना तक न था, सर छुपाने को कोई ठिकाना न था, उदासी थी, मायूसी थी और बस न-उम्मीदों का एक डरावना सा ताना-बाना था। पर दिन सबके बदलते हैं, उसके भी बदल गये। जिंदगी से अबतक जो दर्द मिले थे, वो सर्द हवाओं की तरह फिज़ाओं में फ़ना हो गये।'

बदलाव की यह कहानी शिवपुरी जिले की है। यहां के हातोद ब्लॉक में रहने वाली श्रीमती शांति सहरिया एक समय अपनी झोपड़ी में कठिनाइयों भरा जीवन जीती थीं। उनके परिवार के लिए रोजमर्रा की जरूरतें भी संघर्ष का विषय था। दिहाड़ी मजदूरी से जो कुछ थोड़ी सी कमाई होती, वो उदर पोषण में ही चली जाती। बरसात में उनकी झोपड़ी टपकती और रातें जागते हुए कटती थीं। पढ़ाई-लिखाई और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं उनके लिए सपना थीं। लेकिन आज शांति सहरिया और उनका परिवार एक सुखद बदलाव का अनुभव कर रहा है।

शांति बताती हैं "पहले हमारा जीवन बहुत कठिन था। खाने-पीने का कोई ठिकाना ही न था। न पक्का घर था, न कोई स्थायी रोजगार। पानी के लिए कुएं तक जाना पड़ता था और बच्चों को स्कूल भेजना तो बड़ा ही मुश्किल काम था।"

इस बदलाव की शुरुआत हुई सरकार की योजनाओं से। पीएम आवास योजना के तहत शांति के परिवार को एक पक्की कुटीर मिली। इससे उनका जीवन सुरक्षित और सुविधाजनक हुआ। अब उनका परिवार पूरी कॉलोनी में पक्के मकान के साथ एक सम्मानजनक जीवन जी रहा है।

शांति खुशी-खुशी बताती हैं – "अब हमारे पास अपना घर है, जो बरसात में भी सुरक्षित रहता है। पक्की सड़कों से हम शहर तक आसानी से जा पाते हैं। घर-घर तक नल से जल आने से पीने के पानी की समस्या भी खत्म हो गई है।"

इसके अलावा आय का जरिया विकसित करने के लिए शांति ने बकरियां पालना शुरू किया। पीएम उज्ज्वला योजना के तहत मिले गैस सिलेंडर ने उनके परिवार को चूल्हे के धुएं से स्थायी राहत दे दी। आयुष्मान भारत (निरामयम) योजना से अब उनका परिवार स्वास्थ्य उपचार सेवाओं का मुफ्त लाभ ले सकता है।

"हम हर महीने पोषण आहार की राशि प्राप्त करते हैं, जिससे हमारे बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर हुआ है। अब मुझे विश्वास है कि मेरे बच्चे पढ़-लिखकर एक अच्छा जीवन जी सकेंगे।" शांति गर्व के साथ कहती हैं।

आज शांति और उनका परिवार अपने नए जीवन के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को दिल से धन्यवाद देते हैं। शांति की कहानी एक जीवंत उदाहरण है कि सामूहिक प्रयासों से समाज और गरीबों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

 

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