मध्य प्रदेश बोर्ड के छात्रों के लिए बड़ी खबर, फिर से लागू हुई बेस्ट ऑफ फाइव योजना

भोपाल
एमपी में बोर्ड परीक्षा MP Board Exam में बड़ा बदलाव हुआ है। इसके अंतर्गत परीक्षार्थी 5 पेपर में ही पास हो जाएंगे। हाईस्कूल यानि 10वीं क्लास के 6 प्रश्नपत्रों में से किसी एक में फेल हो जाने पर भी वे पास माने जाएंगे। दरअसल एमपी बोर्ड ने हाईस्कूल के छात्रों के लिए बेस्ट ऑफ फाइव योजना फिर लागू कर दी है। बोर्ड परीक्षार्थियों का मानसिक तनाव कम करने और कमजोर विषयों में राहत देने के उद्देश्य से यह योजना दोबारा लागू की गई है। एमपी बोर्ड परीक्षा में एक बार फिर से बेस्ट ऑफ फाइव योजना को लागू कर दिया गया है। इस योजना से छात्रों को सीधे फायदा होने जा रहा है।

दरअसल, बेस्ट ऑफ फाइव योजना के लागू होने के बाद 10वीं बोर्ड के छह प्रश्नपत्रों में से पांच में पास होने वाले परीक्षार्थी पास माने जाएंगे। इसी साल अप्रैल महीने में स्कूल शिक्षा विभाग ने एक अधिसूचना जारी कर इसे रद्द कर दिया था। हालांकि, एक बार फिर से इसको लागू कर दिया गया है।

बेस्ट ऑफ फाइव योजना के बारे में जानिए

जानकारी दें कि बेस्ट ऑफ फाइव योजना के तहत छात्रों को 10वीं बोर्ड परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन और सफलता की अधिक संभावना होगी। इसी उद्देश्य के साथ इस योजना को राज्य में लागू किया गया था। योजना के तहत अगर कोई परीक्षार्थी छह अनिवार्य प्रश्नपत्रों में से किसी पांच में पास हो जाता है, तो उसे पास माना जाएगा। इस नियम को छात्रों के ऊपर से परीक्षा के तनाव को कम करने के लिए और उनके मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है।

जानिए कैसे काम करेगी ये योजना

    कक्षा 10वीं के लिए एमपी बोर्ड के अंतर्गत 6 अनिवार्य विषयों की परीक्षा होती है।
    योजना के तहत छात्रों को इनमें से किसी पांच विषय में न्यूनतम पासिंग अंक लाने होते हैं।
    अगर कोई छात्र किसी एक विषय में कमजोर है तो उसके लिए ये योजना काफी लाभदायक साबित होगी।
    यदि किसी छात्र का एक विषय कमजोर रहता है, तो वह अन्य पांच विषयों में अच्छे अंक लाकर पास हो सकता है।
    योजना के लागू होने के बाद छात्रों पर पढ़ाई का दबाव कम होता है।
    योजना के लागू होने के बाद छात्रों को अपनी ताकत के अनुसार बेहतर प्रदर्शन करने का मौका मिलता है।

पहले योजना को किया गया रद्द

उल्लेखनीय है कि इस योजना को इस साल अप्रैल के महीने में रद्द कर दिया गया था। इस योजना को रद्द करने के पीछे का उद्देश्य था कि छात्र सभी विषयों पर समान रूप से ध्यान दे सकें और अच्छा कर सकें। हालांकि, बाद में जनहित और छात्रों की मांग को देखते हुए इसे फिर से लागू किया गया है।
किन छात्रों को होगा फायदा

गौरतलब है कि ये योजना उन छात्रों के लिए विषेष रूप से लाभकारी साबित होने जा रही है, जो किसी एक विषय में कमजोर हैं। वहीं, वे अन्य विषयों में अच्छा प्रदर्शन करते हैं। माना जा रहा है कि ये योजना छात्रों के भीतर आत्मविश्वास को बढ़ाती है। इसके अलावा उनके मानसिक तनाव को भी कम करती है, जिससे वे परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।

क्यों किया था रद्द
अप्रैल 2024 में बेस्ट ऑफ फाइव योजना रद्द कर दी गई थी। तब कहा गया था कि बोर्ड परीक्षार्थियोें को सभी विषयों में समान रूप से मेहनत करने और ध्यान देने के लिए प्रेरित करने के लिए ऐसा किया गया।

 

admin

Related Posts

अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति