अध्ययन दल ने गुजरात यात्रा के दूसरे दिन भास्कराचार्य संस्थान और साबरमती रिवर फ्रंट का किया दौरा

भोपाल
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के नेतृत्व में गुजरात अध्ययन यात्रा पर गए दल ने दूसरे दिन गांधीनगर स्थित भास्कराचार्य संस्थान (BISAG-N) एवं अहमदाबाद साबरमती रिवर फ्रंट परियोजना का दौरा किया। अध्ययन दल ने गुजरात सड़क एवं भवन विकास विभाग के अधिकारियों के साथ निर्माण क्षेत्र में उपयोग की जा रही नवीनतम तकनीकों पर भी विस्तार से चर्चा की।

भास्कराचार्य संस्थान की सेवाओं की सराहना

 मंत्री सिंह ने भास्कराचार्य संस्थान द्वारा प्रदान की जा रही आईटी सेवाओं की सराहना करते हुए इन्हें अनुकरणीय बताया। मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग में इन्हें लागू करने के लिए आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने भास्कराचार्य संस्थान की तकनीकी क्षमताओं और सेवाओं को बेहतरीन बताया। मंत्री सिंह ने मुख्य अभियंता एवं अधिकारियों को एक दिन और रुककर संस्थान में प्रशिक्षण लेने और इन तकनीकों को बेहतर तरीके से समझने के निर्देश दिए।

भू-सूचना विज्ञान संस्थान संस्थान के प्रमुख टीपी सिंह ने प्रतिनिधि मंडल को संस्थान की विभिन्न गतिविधियों और जी.आई.एस तकनीक पर आधारित पीएम गतिशक्ति परियोजना की विस्तृत जानकारी प्रदान की। इस दौरान BISAG-N संस्थान ने मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग को विभिन्न प्रकार के आईटी समाधानों और जीआईएस बेस्ड एप्लीकेशन की सेवाएं कम लागत पर प्रदान किए जाने की जानकारी दी।

साबरमती रिवर फ्रंट परियोजना का दौरा

 मंत्री सिंह ने अहमदाबाद स्थित साबरमती रिवर फ्रंट परियोजना का भी दौरा किया। उन्होंने 1200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना को शहरी विकास, नदी संरक्षण, पर्यावरण सुधार और सौंदर्य के साथ नवीनतम निर्माण तकनीकों का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना ने शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित किया है।

 भ्रमण के दौरान रिवर फ्रंट निर्माण के लिये गठित कंपनी के कार्यालय में दिये गये प्रेजेंटेशन में रिवर फ्रंट की शुरुआत, निर्माण में आने वाली चुनौतियां, चरणबद्ध निर्माण प्रक्रिया, और भविष्य की योजना के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में साबरमती रिवर फ्रंट की कुल लंबाई 22 किलोमीटर से भी अधिक होगी और यह दुनिया का सबसे लंबा रिवर फ्रंट बनेगा।

 मंत्री सिंह ने साबरमती नदी पर बने अटल ब्रिज की भी सराहना की। उन्होंने इसे निर्माण तकनीक का एक अनूठा उदाहरण बताते हुए कहा कि 80 करोड़ रुपये की लागत से बना यह ब्रिज आधुनिक तकनीकी, अद्भुत सौंदर्य और कलाकृति का शानदार नमूना है।

गुजरात सड़क एवं भवन विकास के अधिकारियों के साथ की मीटिंग

 दूसरे दिन सत्र की शुरुआत मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग के प्रेजेंटेशन से हुई। लोक निर्माण विभाग ने अपने संक्षिप्त प्रस्तुतीकरण में प्रदेश में अपनाई गयी नई तकनीकों, नवाचारों और आईटी परियोजनाओं की जानकारी दी। गुजरात सड़क एवं भवन विकास के अधिकारियों ने भी मध्यप्रदेश में नियोजित एवं क्रियान्वित नवाचारों को सफल बनाने के लिए अपने सुझाव दिए। सड़क पुल एवं भवन निर्माण के दौरान आने वाली सामान्य समस्याओं पर दोनों राज्यों के अधिकारियों ने चर्चा कर अपने समाधान एक-दूसरे से साझा किये।

 मंत्री सिंह ने गुजरात के दो दिवसीय अध्ययन के अनुभवों और तकनीकों को मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश में लागू करने की बात कही। उन्होंने कहा इस तरह की अध्ययन यात्राओं और परिचर्चाओं को भविष्य में भी निरंतर जारी रखा जाएगा, जिससे प्रदेश में विकास कार्यों में नई तकनीकों और सर्वोत्तम प्रेक्टिसेज़ का समावेश हो सके।

 

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