मुरादाबाद में खोले गया गाैरीशंकर मंदिर का गर्भगृह

 मुरादाबाद

मुरादाबाद के झब्बू का नाला मोहल्ले में स्थित गौरीशंकर मंदिर का गर्भगृह 43 साल बाद सोमवार को खोल दिया गया। 1980 के दंगों के दौरान पुजारी की हत्या के बाद मंदिर को बंद कर दिया गया था। मंदिर के पुजारी के पोते ने डीएम को अर्जी देकर इसे दोबारा खुलवाने की मांग की थी।

प्रशासन ने तीन दिन पहले मौके का निरीक्षण कर मंदिर की स्थिति का आकलन किया। सोमवार को पुलिस और प्रशासन की कड़ी सुरक्षा के बीच मंदिर की दीवारों को तोड़कर खोदाई शुरू की गई। खोदाई में मंदिर के गर्भगृह से मूर्तियां मिली हैं। मंदिर के आसपास सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

प्रशासन का कहना है कि मंदिर को जल्द ही पूरी तरह से पूजा-पाठ के लिए खोला जाएगा। वर्षों से बंद इस मंदिर के खुलने से क्षेत्रवासियों में उत्सुकता बढ़ गई है।

  • admin

    Related Posts

    अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

    अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

    मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

    रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    धर्म

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति