राजस्थान-राज्यपाल ने रणथंभौर नेशनल पार्क में बाघिन रिद्धि और उसके शावकों को देखा

जयपुर।

राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने मंगलवार को सवाई माधोपुर स्थित रणथंभौर नेशनल पार्क का सपरिवार भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने पार्क एरिया में बाघिन रिद्धि और उसके शावकों को देखा। कुछ देर वहीं ठहरकर उन्होंने बाघिन रिद्धि और शावकों की अठखेलियां देखी।

राज्यपाल ने बाघिन परिवार के साथ ही अन्य वन्यजीवों एवं रणथंभौर की प्राकृतिक सुंदरता की सराहना की। उन्होंने अरावली की पहाड़ियों और विंध्य पठार के आसपास स्थित, रणथंभौर वन को भी बहुत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि वन्य जीव अभयारण्य पर्यटन की दृष्टि से देश का यह महत्वपूर्ण स्थान है। इससे पहले रणथंभौर राष्ट्रीय पार्क स्थित जोगी महल में सवाई माधोपुर के वन अधिकारियों ने उनकी अगवानी की तथा राष्ट्रीय पार्क की पारिस्थितिकी के बारे में बताया।

admin

Related Posts

अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति