पूर्व आरटीओ कांस्टेबल सौरभ शर्मा पर रेड केस के बीच मोहन सरकार ने लिया बड़ा एक्शन,परिवहन आयुक्त डीपी गुप्ता को हटाया

भोपाल
 मध्य प्रदेश में करोड़ों की संपत्ति के ज़ब्ती के बाद परिवहन विभाग में बड़ा फेरबदल हुआ है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार ने तीन वरिष्ठ IPS अधिकारियों का तबादला कर दिया है। यह कार्रवाई पूर्व RTO कांस्टेबल सौरभ शर्मा से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी के बाद हुई है। इसमें परिवहन आयुक्त डी.पी. गुप्ता भी शामिल हैं।

भोपाल में हुई छापेमारी के बाद राज्य के परिवहन विभाग पर सवाल उठ रहे थे। इसके चलते 1994 बैच के IPS अधिकारी डी.पी. गुप्ता को ADG पुलिस मुख्यालय (PHQ) नियुक्त किया गया है। गुप्ता फरवरी 2024 में परिवहन आयुक्त बने थे। उनकी जगह 1988 बैच के IPS अधिकारी विवेक शर्मा को नया परिवहन आयुक्त बनाया गया है। विवेक शर्मा पहले PHQ प्लानिंग में ADG थे। इसके अलावा ADG योगेश चौधरी को PHQ प्लानिंग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। यह तबादले सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की अधिसूचना के बाद हुए हैं।

करोड़ों की सपत्ति मिलने के बाद उठने लगे थे सवाल

पूर्व RTO कांस्टेबल सौरभ शर्मा और उनके सहयोगियों के ठिकानों पर ED, आयकर विभाग और लोकायुक्त की SEP ने छापेमारी की थी। इन छापेमारियों में करोड़ों की संपत्ति बरामद हुई है। इसके बाद परिवहन विभाग पर सवाल उठने लगे थे। इन छापेमारियों के बाद ही यह तबादले हुए हैं। इससे साफ़ है कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है।

लावारिस गाड़ी में मिला था 52 किलो सोना

लोकायुक्त ने पिछले हफ्ते छापेमारी में सौरभ शर्मा के पास से 7.98 करोड़ रुपये की चल संपत्ति बरामद की थी। इसमें 2.87 करोड़ रुपये नकद और 235 किलो चांदी शामिल थी। साथ ही कई रियल एस्टेट निवेश दस्तावेज और एक नकदी गिनने की मशीन भी ज़ब्त की गई। इसके बाद आयकर विभाग ने एक और छापेमारी में भोपाल में एक छोड़ी हुई SUV से 40 करोड़ रुपये के 52 किलो सोने के बिस्कुट और 11 करोड़ रुपये से ज्यादा की नकदी बरामद की। यह SUV शर्मा के करीबी सहयोगी चेतन सिंह गौड़ के नाम पर रजिस्टर्ड थी। हालांकि आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है, लेकिन अधिकारियों को शक है कि यह बरामदगी शर्मा से जुड़ी है।

ईडी ने भी दर्ज किया है मामला

लोकायुक्त की FIR के बाद ED ने शर्मा के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है। पिछले शुक्रवार को भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में छापेमारी की गई। ED ने कई जगहों से वित्तीय दस्तावेज, संपत्ति और लैपटॉप व कंप्यूटर से इलेक्ट्रॉनिक डेटा जब्त किया है। सौरभ शर्मा 2015 में अनुकंपा के आधार पर परिवहन विभाग में कांस्टेबल के पद पर नियुक्त हुए थे। उनके पिता सरकारी डॉक्टर थे, जिनकी मृत्यु के बाद उन्हें यह नौकरी मिली थी। शर्मा ने 2023 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी।

मां, पत्नी और साले के नाम पर करोड़ों की संपत्ति

अधिकारियों का आरोप है कि शर्मा ने भ्रष्ट तरीकों से संपत्ति अर्जित की। उन्होंने अपनी माँ, पत्नी, साली और करीबी सहयोगी चेतन गौड़ और शरद जयसवाल के नाम पर एक स्कूल और एक होटल भी बनाया। शर्मा के घर और दफ्तर से जब्त किए गए दस्तावेजों से करोड़ों रुपये के लेनदेन का पता चलता है। इससे पता चलता है कि उनके पास बड़ी मात्रा में नकदी आ रही थी। हालांकि, हो सकता है कि शर्मा को बड़ी मात्रा में नकदी के समय के साथ खराब होने की चिंता रही हो, जिसके कारण उन्होंने कीमती धातुओं को तरजीह दी।

आने वाले समय में होगा बड़ा खुलासा

इस पूरे मामले से मध्य प्रदेश के परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। एक साधारण कांस्टेबल इतनी बड़ी संपत्ति कैसे बना सकता है, यह जांच का विषय है। आने वाले समय में इस मामले में और खुलासे होने की उम्मीद है। सरकार की इस कार्रवाई से यह संदेश ज़रूर जाएगा कि भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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