अमेरिकी संसद में कांग्रेस सदस्य सुभाष सुब्रमण्यम ने गीता पर हाथ रखकर शपथ ली, अमेरिकी संसद में ‘सनातन की गूंज’

वाशिंगटन
अमेरिकी संसद में कांग्रेस सदस्य सुभाष सुब्रमण्यम ने गीता पर हाथ रखकर शपथ ली। उनके शपथ लेने के दौरान उनकी मां भी मौजूद थीं। वह इकलौते भारती-अमेरिकी सांसद रहे जिन्होंने पवित्र हिन्दू ग्रंथ पर हाथ रखकर शपथ ली। सुब्रमण्यम ने रविवार को एक्स पर लिखा, "कल, मैंने भगवद गीता पर हाथ रखकर वर्जीनिया से पहले भारतीय अमेरिकी और दक्षिण एशियाई कांग्रेसमैन के रूप में शपथ ली। मेरी मां, जो भारत से डलेस पहुंची थीं, ने शायद इसकी कल्पना नहीं की होगी, लेकिन यही अमेरिका का वादा है। वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट का प्रतिनिधित्व करने का सम्मान।'

तुलसी गबार्ड पहली सदस्य थीं जिन्होंने गीता पर हाथ रखकर शपथ ली थी। उन्होंने पहली बार 3 जनवरी, 2013 को हवाई के दूसरे कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रतिनिधि सभा के सदस्य के रूप में शपथ ली थी। गबार्ड अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए चुनी जाने वाली पहली हिंदू अमेरिकी हैं। किशोरावस्था में हिंदू धर्म अपनाने वाली गबार्ड अब राष्ट्रीय खुफिया निदेशक के शक्तिशाली पद के लिए नामांकित हैं।

बता दें इस बार 6 भारतीय अमेरिकी संसद पहुंचे हैं। कांग्रेस के निचले सदन के लिए यह भारतीय अमेरिकियों का अब तक सबसे बड़ा शपथ ग्रहण था। शपथ लेने वालों में कांग्रेस सदस्य डॉ. अमी बेरा सबसे वरिष्ठ हैं। उन्होंने कैलिफोर्निया के सातवें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट के प्रतिनिधि के रूप में लगातार सातवीं बार शपथ ली। मिशिगन के 13वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट का प्रतिनिधित्व करने वाले कांग्रेसी थानेदार, कैलिफोर्निया के 17वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट का प्रतिनिधित्व करने वाले रो खन्ना और इलिनोइस के आठवें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट का प्रतिनिधित्व करने वाले राजा कृष्णमूर्ति ने भी शपथ ली।

वाशिंगटन राज्य के सातवें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट का प्रतिनिधित्व करने वाली प्रमिला जयपाल प्रतिनिधि सभा के लिए चुनी जाने वाली पहली भारतीय अमेरिकी महिला हैं।
सभी छह भारतीय अमेरिकी सांसद डेमोक्रेटिक पार्टी से हैं और उन्होंने सदन के स्पीकर पद के लिए चुनाव में सदन के अल्पसंख्यक नेता हकीम जेफ्रीज को वोट दिया। हालांकि रिपब्लिकन माइक जॉनसन को सदन का अध्यक्ष चुना गया। दलीप सिंह सौंद 1957 में प्रतिनिधि सभा के लिए चुने जाने वाले पहले भारतीय अमेरिकी और सिख थे। वह डेमोक्रेटिक पार्टी से थे और लगातार तीन कार्यकाल के लिए चुने गए थे।

दूसरे भारतीय अमेरिकी को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में प्रवेश करने में लगभग पांच दशक लग गए। बॉबी जिंदल ने 2005 से 2008 तक लुइसियाना के पहले कांग्रेसनल जिले का प्रतिनिधित्व किया। बाद में वे लुइसियाना के दो-कार्यकाल वाले गवर्नर बने, जिससे वे किसी अमेरिकी राज्य के गवर्नर के रूप में चुने जाने वाले पहले भारतीय अमेरिकी बन गए। जिंदल रिपब्लिकन टिकट पर सदन में चुने जाने वाले एकमात्र भारतीय अमेरिकी रहे हैं।

  • admin

    Related Posts

    हवाई हादसों का दर्दनाक इतिहास: अजित पवार दुर्घटना से पहले इन 11 दिग्गजों की भी ऐसे ही हुई थी मौत

    नई दिल्ली बुधवार की सुबह महाराष्ट्र और देश की राजनीति के लिए गहरे शोक की खबर लेकर आई, जब महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार और चार अन्य लोगों की एक…

    हमें पता है क्या हो रहा है — UGC रेगुलेशन मामले में दखल देगा सुप्रीम कोर्ट

    नई दिल्ली जातिगत भेदभाव से जुड़े UGC के नए नियमों के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है। शीर्ष न्यायालय ने बुधवार को इस…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    धर्म

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति