अंगूर खाओगे, तो ये रोग होंगे दूर

अंगूर स्वादिष्ट होने के साथ-साथ अनेक पौष्टिक गुणों से युक्त होते हैं। इनमें विटामिन, पोटेशियम, कैल्शियम, फास्फोरस, कार्बोहाइड्रेट और ग्लूकोज पर्याप्त मात्रा में होता है, जो शरीर में खून की वृद्धि करता है व कमजोरी दूर करता है।

एनर्जी:- अंगूर में मौजूद शर्करा रक्त में आसानी से अवशोषित हो जाती है और थकान दूर कर शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है।

सफाई:- अंगूर शरीर में मौजूद विषैले तत्वों को आसानी से शरीर से बाहर निकाल देता है। अंगूर रक्त की क्षारीयता को संतुलित करता है। किसी कारणवश शरीर में अम्लता बढ़ जाए तो वह हानिकारक साबित होती है। ऐसा होने पर 20 से 30 ग्राम अंगूर खाएं।

मिर्गी:- अंगूर को रोजाना खाने से कैंसर, एपेंडिक्स, बच्चों में कमजोरी, मिर्गी, रक्त संबंधी विकार, आमाशय में घाव और कमजोरी में लाभ मिलता है।

पाचन:- यदि किसी ने धतूरा खा लिया हो तो उसे दूध में अंगूर का सिरका मिलाकर दें। यह टायफॉइड, मानसिक परेशानी और पाचन की गड़बड़ी में भी लाभकारी होता है।

 

  • admin

    Related Posts

    चाणक्य नीति के अनुसार: इन पारिवारिक बातों को बाहर बताया तो बिखर सकता है पूरा परिवार

    कूटनीति और जीवन दर्शन के महानायक माने जाने वाले आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी सदियों पहले थीं। चाणक्य नीति केवल राज्य चलाने का शास्त्र…

    AI की रेस में चीन का Kling आगे? जानिए क्यों दुनियाभर में मचा रहा है तहलका

    नई दिल्ली AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से वीडियो बनाने का ट्रैंड इन दिनों काफी चल रहा है। क्रिएटर्स के लिए AI एक जरूरी टूल बन गया है। चीन की कंपनी Kuaishou…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    धर्म

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति