एमपी चल रही अग्निवीर भर्ती, तीन दिन में सेना के अधिकारियों ने दस्तावेज परीक्षण में 42 जालसाज अभ्यर्थियों को पकड़ा

ग्वालियर
भारतीय सेना में अग्निवीर भर्ती के लिए चल रही शारीरिक परीक्षा में जालसाज अभ्यर्थी पकड़े गए हैं। तीन दिन में सेना के अधिकारियों ने दस्तावेज परीक्षण में 42 जालसाज अभ्यर्थियों को पकड़ा। इनमें से किसी ने आधार कार्ड, मार्कशीट में अपनी जन्मतिथि बदली तो किसी ने पता ही बदल डाला। यह खुलासा दस्तावेजों की जांच में हुआ। इसके बाद इनके दस्तावेज जब्त कर इन्हें भर्ती प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया।

कॉलेज के मैदान में चल रही शारीरिक परीक्षा
इन्हें सेना द्वारा ब्लैकलिस्ट भी कर दिया गया है, जिससे आगामी किसी भर्ती में यह फर्जीवाड़ा कर शामिल न हो सकें। सागर के इंदिरा गांधी इंजीनियरिंग कॉलेज के मैदान पर छह जनवरी से शारीरिक परीक्षा चल रही है। छह, सात और आठ जनवरी को शारीरिक परीक्षा में उत्तीर्ण हुए अभ्यर्थियों को दस्तावेज परीक्षण के लिए भेजा गया। दस्तावेज परीक्षण एक दिन बाद हो पाता है। गुरुवार तक 42 ऐसे अभ्यर्थियों को पुलिस ने पकड़ा, जिन्होंने दस्तावेज में फर्जीवाड़ा किया। कुछ ने तो दस्तावेज ही फर्जी तैयार कराए। इन्हीं के आधार पर भर्ती में शामिल हो गए।

शारीरिक परीक्षा उत्तीर्ण कर मेडिकल तक आधे ही पहुंच सके
शारीरिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद आधे अभ्यर्थी किसी न किसी वजह से अनफिट हो गए। आधे ही मेडिकल पूरा होने के बाद फिट पाए गए। इन्हें आगामी प्रक्रिया के लिए भेजा गया। पहले दिन शारीरिक परीक्षा 336 ने उत्तीर्ण की, फिट 156 पाए गए। जबकि दूसरे दिन 298 ने परीक्षा उत्तीर्ण की और 173 फिट पाए गए, तीसरे दिन 317 ने परीक्षा उत्तीर्ण की, इसमें से 180 फिट पाए गए।

यह की हेराफेरी उप्र और राजस्थान के अभ्यर्थी पता बदलकर हुए शामिल
सेना में अग्निवीर भर्ती के लिए जो उम्र निर्धारित है, वह उम्र पूरी होने के बाद भी कुछ अभ्यर्थियों ने दस्तावेजों में जन्मतिथि में हेरफेर की और परीक्षा में शामिल हो गए। जब आधार कार्ड की जांच सेना द्वारा की गई तो यह फर्जीवाड़ा खुला।
फर्जीवाड़े में कुछ ऐसे अभ्यर्थी भी शामिल थे, जिन्होंने झूठा पता लिख दिया। यह लोग मूल रूप से उप्र और राजस्थान के रहने वाले थे। मप्र का पता डालकर परीक्षा में शामिल हो गए। यह भर्ती मध्यप्रदेश के ग्वालियर सहित दस जिलों के लिए थी। इसमें उप्र, राजस्थान तक के युवक फर्जीवाड़ा कर शामिल हुए। यह फर्जीवाड़ा जांच में पकड़ा गया।

दलाल भी सक्रिय, सेना के अधिकारी बोले- सावधान रहें
दलाल भी खूब सक्रिय हैं। यह लोग भर्ती स्थल से लेकर सेना भर्ती कार्यालय के आसपास भी घूमते रहते हैं। यह लोग परीक्षा में उत्तीर्ण कराने का झांसा देकर ठगते हैं। इस संबंध में सेना द्वारा एडवायजरी जारी की गई है।

चौथा दिन : 1062 में से 389 अभ्यर्थी दौड़ में सफल
गुरुवार को छतरपुर, मुरैना, सागर और टीकमगढ़ के 1062 अभ्यर्थियों ने शारीरिक परीक्षा में भाग लिया। इसमें से 389 अभ्यर्थियों ने सफलता हासिल की।

admin

Related Posts

अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति