प्रदेश में शीतलहर के कहर से बदला स्कूल और आंगनबाड़ी का समय, डीएम ने दिया अनुपालन का आदेश

खरगोन
 पहाड़ी इलाको में हो रही बर्फबारी और बारिश से सर्द हवाएं तेज हो गई है. मध्य प्रदेश के कई जिलों समेत खरगोन भी शीतलहर की चपेट में है. सुबह कोहरे और अत्यधिक ठंड के चलते लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है. सबसे ज्यादा दिक्कतें स्कूल जानें वाले छोटे बच्चों को हो रही है. वहीं, बढ़ती ठंड से तामपान में हो रही गिरावट को ध्यान में रखते हुए जिला कलेक्टर ने स्कूली बच्चों को राहत देने के लिए स्कूलों का समय बदल दिया है. अब सुबह 9:30 बजे के पहले स्कूलों का संचालन नहीं हो पाएगा.

दरअसल, कंपकपा देने वाली ठंड की वजह से जिला प्रशासन ने स्कूली बच्चों के स्वास्थ को दृष्टिगत रखते हुए कक्षा नर्सरी से कक्षा 8वीं तक की कक्षाओं के संचालन समय में बदलाव के आदेश जारी किए है. जिला कलेक्टर के अनुमोदन पर जिला शिक्षा अधिकारी शैलेंद्र कानुड़े ने यह आदेश (2025/173) जारी किया है. आदेश जिले की सभी सरकारी एवं प्रायवेट स्कूलों में लागू होगा. आदेश का पालन नहीं करने वाली स्कूली संस्थाओं पर उचित कार्रवाई की जाएगी.

अब 9:30 के पहले नहीं लगेगी स्कूल
सोमवार 13 जनवरी 2025 की देर रात जारी आदेश के मुताबिक कक्षा नर्सरी से कक्षा 8वीं तक की सभी शासकीय, अशासकीय, सीबीएसई/आईसीएसई एवं अन्य समस्त शैक्षणिक स्कूलें सुबह 9:30 बजे से पहले संचालित नहीं होगी. आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होकर 20 जनवरी 2025 तक प्रभावशील रहेगा. बता दें कि प्रशासन के इस आदेश से बच्चों को काफी हद तक राहत मिलेगी. फिलहाल, 26 जनवरी 2024 गणतंत्र दिवस के दिन स्कूलों का संचालन प्रातः 7 बजे से रहेगा. जबकि कक्षा 6टी से कक्षा 12वीं तक की कक्षाएं पूर्व निर्धारित समय पर ही संचालित होगी.

– 2.5 डिग्री सेल्सियस तक गिरा तामपान
बता दें कि, पिछले एक सप्ताह से खरगोन में भारी ठंड का दौरा जारी है. हालांकि, बीच में थोड़ी राहत मिली थी, पर रविवार रात से ठंड ने फिर अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है. मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटों में न्यूनतम तापमान में लगभग 2.5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट हुई है. मंगलवार को खरगोन में न्यूनतम 10 डिग्री तामपान रिकॉर्ड किया गया. वहीं, ठंड के कारण सुबह देर तक कोहरा छाया हुआ है. आवाजाही के दौरान लोगों को वाहनों की हैडलाइट जलानी पड़ रही है. सर्दी से बचने के लिए लोग दिन में भी गर्म कपड़ों और अलाव का सहारा ले रहे है.

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