मकर संक्रांति से 28 जनवरी तक प्रदेश के हर गांव और शहर में होगा उत्सव : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

आनंद उत्सव में बिखरेंगी खुशियां, हर चेहरे पर होगी मुस्कान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मकर संक्रांति से 28 जनवरी तक प्रदेश के हर गांव और शहर में होगा उत्सव : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रतिस्पर्धा नहीं सहभागिता है आनंद उत्सव की मूल भावना  : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भारतीय परम्परा में आनंद की अवधारणा पर केंद्रित होंगी गतिविधियां

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मकर संक्रांति से 28 जनवरी तक प्रदेश के हर गांव और शहर में आनंद उत्सव मनाया जाएगा। डॉ. यादव ने सभी ओर खुशियां बिखरने और हर चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए राज्य सरकार द्वारा की गई इस पहल में सभी प्रदेशवासियों से जुड़ने की अपील की है। उन्होंने कहा कि परंपराओं और संस्कृति का संरक्षण राज्य सरकार का प्रण है। लोक-संस्कृति में रची-बसी गतिविधियों का सामुदायिक स्तर पर संचालन जीवन में आनंद का संचार करता है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए संपूर्ण प्रदेश में आनंद उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि नागरिकों में सहभागिता और उत्साह को बढ़ाने के लिए हर गांव और शहर में समूह स्तर पर परंपरागत खेल और संस्कृति से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि आनंद उत्सव की मूल भावना प्रतिस्पर्धा नहीं सहभागिता है।

आनंद और प्रसन्नता का संचार जीवन को परिपूर्ण बनाने के लिए आवश्यक

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नागरिकों की मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक उन्नति और प्रसन्नता, प्रदेश के विकास और खुशहाली के लिए आवश्यक है। आधारभूत आवश्यकताओं तथा अधोसंरचना की उपलब्धता के साथ आनंद और प्रसन्नता का संचार जीवन को परिपूर्ण बनाने के लिए जरूरी है। सांस्कृतिक आयोजन तथा खेल, व्यक्ति की मानसिक-शारीरिक और भावनात्मक सकुशलता बढ़ाने के मुख्य कारक हैं। आनंद उत्सव का आयोजन इन्हीं तथ्यों के आधार पर किया जा रहा है। इसके अंतर्गत होने वाली गतिविधियां, भारतीय परम्परा में आनंद की अवधारणा पर केन्द्रित होंगी।

आनंद उत्सव में दिव्यांगों और बुजुर्गों के अनुकूल भी होंगी गतिविधियां

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आनंद उत्सव में प्रमुख रूप से स्थानीय तौर पर प्रचलित परंपरागत खेल-कूद जैसे कबड्डी, खो-खो, बोरा रेस, पिठ्ठू, सितोलिया, नीबू दौड़ आदि होंगे। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अंतर्गत लोक संगीत, नृत्य, गायन, भजन, कीर्तन, नाटक तथा स्थानीय स्तर पर तय अन्य कार्यक्रम आयोजित होंगे। आनंद उत्सव का आय़ोजन इस तरह होगा, जिससे गतिविधियों में समाज के सभी वर्गों जैसे महिला-पुरुष, सभी आयु वर्ग के नागरिक, दिव्यांग आदि शामिल हो सकें। उत्सव में 50 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के महिला/पुरुषों, दिव्यांगों और बुजुर्गों की विशेष सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए उनके अनुकूल गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत भी किया जाएगा।

आयोजन में शासकीय अमले के साथ स्वयंसेवी संस्थाएँ भी होंगी सहभागी

राज्य आनंद संस्थान और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के साथ स्वयंसेवी संस्थाओं, जन-प्रतिनिधि और राज्य आनंद संस्थान के स्वयं-सेवकों की सक्रिय सहभागिता से हो रहे आनंद उत्सव के आयोजन में ग्राम स्तर पर पंचायतें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। जनपद, अनुविभाग और जिलास्तर पर अधिकारियों को आवश्यक समन्वय का दायित्व सौंपा गया है।

 

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