मासिक शिवरात्रि का व्रत 27 या 28 जनवरी… कब रखा जाएगा

हिंदू धर्म में मासिक शिवरात्रि का विशेष महत्व होता है. इस दिन लोग भगवान शिव की पूजा तथा व्रत का पालन करते हैं. मासिक शिवरात्रि पर रात्रि में पूजा का खास महत्व होता है. भगवान शिव को समर्पित यह व्रत हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को किया जाता है. भगवान शिव को प्रसन्न कर उनकी कृपा पाने के लिए मासिक शिवरात्रि को सबसे उत्तम माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है. इसके अलावा जीवन के सभी कष्टों से भी मुक्ति मिलती है.

कब है मासिक शिवरात्रि?
वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत सोमवार, 27 जनवरी को रात्रि 8 बजकर 34 मिनट पर होगी. वहीं तिथि का समापन अगले दिन यानी मंगलवार को शाम 7 बजकर 35 मिनट पर होगा. शिवरात्रि का पूजन रात्रि के समय किया जाता है, इसलिए इस बार यह व्रत 27 जनवरी को किया जाएगा.

मासिक शिवरात्रि पूजा का शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ माह की मासिक शिवरात्रि पर पूजा के शुभ मुहूर्त रात्रि 12 बजकर 7 मिनट से लेकर रात्रि 1 बजे तक रहेगा. ऐसे में भक्तों को भोलेनाथ की पूजा करने के लिए कुल 53 मिनट का समय मिलेगा.

मासिक शिवरात्रि पूजा विधि
मासिक शिवरात्रि के दिन सुबह उठकर स्नान आदि कर साफ-सुथरे कपड़े पहन लें. इसके बाद भगवान सूर्य को जल अर्पित करें. अब मंदिर की साफ कर गंगाजल छिड़ककर शुद्ध कर लें. एक चौकी पर शिवलिंग या शिव परिवार की तस्वीर रखें. शिवजी को जल, कच्चा दूध, गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा, भांग, धूप-दीप, फल, फूल और मिठाई अर्पित करें. भोलेनाथ के सामने घी का दीपक जलाएं. फिर शिव चालीसा और मंत्रों का जाप करें. अंत में शिव जी की आरती करें और फिर प्रसाद का भोग लगाएं.

  • admin

    Related Posts

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बताया गया है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। मान्यता है कि एकादशी के दिन विधि-विधान से…

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है. जब प्रदोष व्रत शुक्रवार के दिन पड़ता है, तो इसे शुक्र प्रदोष कहा जाता है. यह व्रत न केवल भगवान शिव…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    धर्म

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति