दूरस्थ ग्राम बनखेता के 36 घरों में पहुंची पानी की आसान सुविधा, हैंडपंप पर निर्भरता हुई खत्म

अम्बिकापुर

जिले के विकासखण्ड लखनपुर का मात्र 189 की आबादी वाला सुदूर बनखेता गांव, जो पहले पेयजल की समस्या से जूझ रहा था। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित योजनाओं की वजह से इस समस्या से मुक्त हो गया है। गांव के लोग अब बेहद खुश हैं कि गांव के हर घर में अब नल लग गया है। गौरतलब है कि जल जीवन मिशन के तहत गांव के 36 परिवारों के घरों में नल से जल कनेक्शन दिया गया है। जल जीवन मिशन के तहत गांव में 10 हजार लीटर क्षमता वाले स्टील स्ट्रक्चर का निर्माण किया गया है, जो सभी ग्रामवासियों को शुद्ध पेयजल प्रदान कर रहा है। कार्य पूर्ण होने पर ग्राम बनखेता के लोगों को शुद्ध पेयजल आपूर्ति की खुशी में हर घर जल उत्सव भी गांव में पूर्व में मनाया गया था। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा प्राप्त जानकारी अनुसार ग्राम बनखेता को “हर घर जल ग्राम घोषित“ किया गया है।

दिनचर्या में आया बदलाव, अब हैंडपंप पर निर्भरता भी हुई खत्म
ग्रामीणों ने बताया कि हमारे घरों में नल लगने के बाद हम ग्रामवासियों की दिनचर्या में बदलाव आया है। पहले हमें पानी के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती थी। महिलाओं का आधा समय तो पानी की व्यवस्था में निकल जाता था। गांव में जो हैण्डपंप है, उसमें बरसात में गंदा पानी निकलने की समस्या भी बनी रहती थी। जिससे बीमारी का खतरा रहता था। ऐसे में चलकर 4 किलोमीटर दूर दूसरे गांव जाने के बाद पानी मिल पाता था। दैनिक कार्यों में भी बहुत समस्या होती थी। गर्मी के दिनों में भू जल स्तर में गिरावट की समस्या के कारण हैण्डपंप के जल का स्तर नीचे चले जाने से पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल पाता था। लेकिन अब जल जीवन मिशन के तहत नल कनेक्शन लग जाने से हमारी सारी समस्याएं खत्म हो गई हैं। ग्राम की 5 महिलाओं द्वार गठित जल वहिनियों का समूह समय- समय पर पानी की शुद्धता की जांच करते हैं। जिससे शुद्ध पेयजल ग्राम वासियों तक पहुंच पाता है।
ग्रामीण जयंती देवी बताती हैं कि नल कनेक्शन मिलने से पहले हमें पेयजल के लिए हैण्डपंप पर निर्भर रहना पड़ता था और अपनी बारी के इंतजार में बहुत समय व्यतित हो जाता था। जिससे अपने घरेलू कार्य एवं कृषि कार्य करने में पिछड़ जाते थे और कई महत्वपूर्ण कार्य समय के कमी के कारण नहीं हो पाता था। उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत अब घर पर ही टेप नल लगाए जाने से पानी भरने हेतु हैण्डपंप पर निर्भर नहीं होना पड़ता, अब सारा काम सही समय पर हो जाता है। जिससे महिलाओं को काफी राहत मिली है और दूसरे कार्यों में भी समय दे पा रहें हैं।

पानी लाने की जुगत में बच्चों को समय ही नहीं दे पाते थे, पर अब आसानी से मिल रहा पानी
ग्रामीण तीजो सिंह- पहले हमें पानी भरने पैदल चलकर दूसरे गांव तक जाना पड़ता था। कोई भी मौसम हो बरसात, सर्दी, गर्मी सभी का सामना करते हुए पानी लेने जाना बहुत मुश्किल होता था। हम बच्चों को भी समय नहीं दे पा रहे थे, परंतु अब जल जीवन मिशन योजना से घर पर ही शुद्ध पेयजल प्राप्त हो रहा है जिससे मैं बहुत खुश हूं।

  • admin

    Related Posts

    अंबिकापुर: जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

    अम्बिकापुर सरगुजा जिला एवं सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल मिलने से बुधवार को प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया। यह धमकी जिला न्यायाधीश की आधिकारिक ई-मेल…

    मतदाता सूची शुद्धिकरण पर फोकस, रोल ऑब्ज़र्वर अभिनव गुप्ता ने किया फील्ड निरीक्षण

    रायपुर. निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यों का रोल ऑब्जर्वर  अभिनव गुप्ता ने किया निरीक्षण निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के अंतर्गत भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    धर्म

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

    17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति