नोएडा की सड़कों पर 2020 से 2024 तक 57 प्रतिशत दुर्घटनाओं में वृद्धि हुई, सर्दियों में स्पीड लिमिट कम की गई

नोएडा
 नोएडा की सड़कों के विकास के साथ जहां वाहनों की रफ्तार बढ़ी है, उसके साथ ही इन पर हादसों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। वर्ष 2020 से लेकर 2024 तक 5 साल के रिकॉर्ड की बात करें तो सड़क हादसों और उसमें जान गंवाने वालों की संख्या बढ़ी है। सिर्फ 2024 में बीते साल की तुलना में सिर्फ 9 हादसे कम हुए हैं। वहीं यहां हर दिन सड़क हादसे में 1 से अधिक मौत होती है।

डीसीपी ट्रैफिक लखन यादव ने बताया कि सड़क हादसों को कम करने के लिए काम किए जा रहे हैं। सर्दियों में नोएडा की प्रमुख सड़कों पर स्पीड लिमिट कम की गई है। इसके अलावा लगातार लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है। कई बार हेलमेट नहीं लगाने या गलत तरीके से चलने के कारण हादसे होते हैं। इसके लिए कार्रवाई के साथ लोगों को जागरूक करने पर भी फोकस किया जा रहा है।

2020 से 57 फीसदी बढ़े हैं हादसे

पुलिस के डेटा की बात करें तो 2020 में गौतमबुद्धनगर में 740 हादसे हुए थे, जो 2024 तक 57 फीसदी बढ़कर 1165 हो गए हैं। वहीं इन हादसों में मरने वालों की संख्या 462 रही है। 2020 में 380 लोगों की जान सड़क हादसों में गई थी। 2020 के बाद 2023 तक हर साल सड़क हादसों और उसमें मरने वालों की संख्या बढ़ी है। सिर्फ 2024 में मामूली का अंतर आया है।

गर्मियों को ज्यादा सड़क हादसे

हादसों के डेटा को देखें तो पता चलता है कि सर्दियों के चार महीने जनवरी, फरवरी नवंबर और दिसंबर की तुलना में गर्मियों के महीने अप्रैल से लेकर जुलाई में ज्यादा हादसे हुए हैं। वहीं इस दौरान सड़क हादसे में ज्यादा जान भी गई है। अक्सर सर्दियों में होने वाले हादसों को लेकर पुलिस की तरफ से तैयारी की जाती है। इस साल भी हादसों को कंट्रोल करने के लिए वाहनों की स्पीड को कम किया जाता है।

डार्क स्पॉट की संख्या हुई कम

डीसीपी ट्रैफिक ने बताया कि हादसों को कंट्रोल करने के लिए काम किया जा रहा है। इसका असर आगे आने वाले दिनों में दिखाई देगा। उन्होंने बताया कि गौतमबुद्धनगर में हादसों के डार्क स्पॉट की संख्या को कम किया गया है। बीते साल तक यहां 29 डार्क स्पॉट जो इस साल कम होकर 19 हो गए हैं। आने वाले दिनों में यह संख्या और कम करने का प्रयास किया जा रहा है।

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