PM मोदी आज 10 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में 65 लाख स्वामित्व संपत्ति कार्ड बांटे

नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 10 राज्यों व 2 केंद्र शासित प्रदेशों के 50,000 से अधिक गांवों में संपत्ति मालिकों को स्वामित्व योजना के तहत 65 लाख से अधिक संपत्ति कार्ड वितरित किये हैं। पीएम मोदी ने शनिवार दोपहर एक कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम ये संपत्ति कार्ड वितरित किये। इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मिजोरम, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दो केंद्र शासित प्रदेश जम्मू- कश्मीर एवं लद्दाख के संपत्ति मालिकों को संपत्ति कार्ड जारी किये गए। पीएम ने कहा कि देश के विकास में जमीन और मकान एक बड़ी भूमिका निभाता है। जब संपत्ति का रिकॉर्ड होता है, तो नागरिकों में आत्मविश्वास बढ़ता है। अब तक 1.25 करोड़ से अधिक संपत्ति कार्ड तैयार किये जा चुके हैं।
क्या होते हैं संपत्ति कार्ड?

संपत्ति कार्ड स्वामित्व योजना के तहत तैयार किये जाते हैं। इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन के रिकॉर्ड को डिजिटल तरीके से तैयार किया जाता है। इसमें लोगों को जमीन के मालिकाना हक का अधिकार दिया जाता है, जिससे भूमि विवादों को कम किया जा सके। साथ ही योजना का उद्देश्य जमीन के मालिकाना हक को स्पष्ट करना है, जिससे किसानों को आसानी से लोन मिल सके। इस योजना में ड्रोन सर्वे, GIS और दूसरी आधुनिक तकनीक का यूज करके मालिकाना हक स्पष्ट किया जाता है।
क्या हैं संपत्ति कार्ड के फायदे?

संपत्ति कार्ड से गांवों में संपत्ति का स्पष्ट स्वामित्व सुनिश्चित हुआ है। इसमें भूमि और सीमाओं का मानचित्रण करने के लिए ड्रोन तकनीक का उपयोग किया जाता है। इससे हर जमीन का स्वामित्व तय हो जाता है। इस योजना से लाखों किसानों को पैतृक भूमि का कानूनी स्वामित्व दिया गया है। इससे किसान सशक्त बने हैं। वे अब भविष्य की आवश्यकताओं के लिए आसानी से लोन भी ले सकते हैं। इस योजना ने किसानों में सुरक्षा और वित्तीय स्वतंत्रता की भावना पैदा की है।

क्या है स्वामित्व योजना?

    स्वामित्व योजना की शुरुआत नवीनतम ड्रोन तकनीक के माध्यम से सर्वेक्षण के लिए की गई। इसके लिए गांवों में बसे हुए क्षेत्रों में घरों के मालिक परिवारों को 'अधिकारों का रिकॉर्ड' प्रदान करके ग्रामीण भारत की आर्थिक प्रगति को बढ़ाने के उद्देश्य से कार्य किया गया।
    स्वामित्व (गांवों का सर्वेक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर तकनीक के साथ मानचित्रण) पहल ग्रामीण भारत को बदलने में महत्वपूर्ण प्रगति कर रही है।
    इस पहल के तहत, सरकार सटीक संपत्ति स्वामित्व डेटा प्रदान कर रही है, जिसमें स्पष्ट स्वामित्व रिकॉर्ड लोगों को मिलता है, जिससे भूमि विवाद कम हो गए हैं।

योजना से क्या हुआ लाभ?

    इस योजना ने भारत के ग्रामीण सशक्तिकरण और शासन यात्रा में एक मील का पत्थर साबित किया है।
    यह योजना संपत्तियों के मुद्रीकरण को सुगम बनाने में भी मदद करती है।
    इस कार्ड के माध्यम से गांव के लोग बैंक ऋण पा सकते हैं।
    योजना से संपत्ति से संबंधित विवाद कम हुए हैं।
    स्वामित्व योजना ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्तियों और संपत्ति कर के बेहतर मूल्यांकन की सुविधा प्रदान करती है।

अब तक 2 करोड़ 25 लाख संपत्ति कार्ड तैयार

बता दें कि 3 लाख 17 हजार से अधिक गांवों में ड्रोन सर्वेक्षण पूरा हो चुका है। ये आंकड़ा लक्षित गांवों के 92 फीसद को कवर करता है। अब तक 1 लाख 53 हजार से अधिक गांवों के लिए लगभग 2 करोड़ 25 लाख संपत्ति कार्ड तैयार किए जा चुके हैं।

यह योजना पुडुचेरी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, त्रिपुरा, गोवा, उत्तराखंड और हरियाणा में पूरी तरह से लागू हो चुकी है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों और कई केंद्र शासित प्रदेशों में भी ड्रोन सर्वेक्षण पूरे हो चुके हैं।

यह योजना 24 अप्रैल 2020 (राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर) को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू की गई थी।

 

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