राजस्थान-बूंदी में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर बोले-विद्यालयों में सूर्य नमस्‍कार अनिवार्य व गांव में रात गुजारें अधिकारी

जयपुर।

शिक्षा एवं पंचायतीराज विभाग मंत्री श्री मदन दिलावर ने शनिवार को बूंदी सर्किट हाऊस में जिला स्‍तरीय अधिकारियों की बैठक लेकर राज्‍य सरकार की कल्‍याणकारी योजनाओं एवं कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की और आवश्‍यक दिशा निर्देश दिए। इस दौरान उन्‍होंने ग्रामीण विकास तथा शिक्षा विभाग की योजनाओं की विस्‍तार से समीक्षा की।

बैठक में श्री दिलावर ने निर्देश दिए कि जिले के विद्यालयों में अनिवार्य रूप से सूर्य नमस्‍कार हो, इसकी सभी तैयारियां पूरी रखें। उन्‍होंने निर्देश दिए कि अधिकारी महीने में चार दिन गांवों में रात्रि विश्राम करें और ग्रामीणजनों की समस्‍याओं को जानकारी लेकर उनका निस्‍तारण कर राहत दें। उन्‍होंने कहा कि एक गांव में बार—बार रात्रि विश्राम नहीं हो और शाम 6 बजे गांव में पहुंचने  के बाद अगली सुबह 6 बजे की गांव से प्रस्‍थान किया जाए। इस अवधि के दौरान अधिकारी उन्‍हें प्राप्‍त होने वाली समस्‍याओं का समाधान करना सुनिश्चित करें। शिक्षा मंत्री ने निर्देश दिए कि राज्‍य सरकार की मंशानुरूप आमजन की समस्‍याओं की समस्‍याओं का समाधान हो और उन्‍हें राहत मिले। उन्‍होंने निर्देश दिए कि गांवों में आयोजित रात्रि चौपाल का रिकॉर्ड संधारण किया जाए। उन्‍होंने निर्देश दिए कि गांवों में सर्वांगीण विकास के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। जिस मद की राशि है, उसी मद में खर्च की जाए। ऐसा नहीं करने वाले अधिकारियों के विरूद्ध नियमानुसार कार्यवाही अमल में लाई जाए। उन्‍होंने निर्देश दिए कि जिले में ऐसे घुमंतु परिवार जिन्‍हें अभी तक पट्टे नहीं मिल पाए है, उनके लिए आगामी बसंत पंचमी को शिविर आयोजन कर, पट्टे वितरित किए जाएं। उन्‍होंने निर्देश दिए कि एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत 150-200 पौधों पर एक केयर टेकर लगाया जाए। साथ ही जो भी पौधा नष्‍ट होता है, उसके स्‍थान पर नया पौधा लगाया जाए। उन्‍होंने निर्देश दिए कि गांवों में साफ सफाई पर विशेष ध्‍यान दिया जाए। नालियों की नियमित रूप से साफ सफाई हो। इसके अलावा राजस्‍थान को प्‍लास्टिक मुक्‍त बनाने के दृष्टिगत गांवों को भी प्‍लास्टिक मुक्‍त बनाने की  दिशा में कार्य योजना बनाकर कार्य करें।

उन्‍होंने कहा कि राजकीय कार्यालयों, कार्यक्रम एवं दैनिक जीवन में प्‍लास्टिक का उपयोग प्रतिबंधित रहे, ताकि पर्यावरण संरक्षरण को बढावा मिले। उन्‍होंने निर्देश दिए कि पॉलीथीन को उत्‍पादन करने वालों को इसके दुष्‍परिणामों की जानकारी देकर उन्‍हें उत्‍पादन नहीं करने के लिए समझाईश करें। साथ ही आमजन को भी इसका उपयोग नहीं करने के लिए समझाईश हो।

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