सरकार ने भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने ये मसौदा दिशानिर्देश तैयार किए

नई दिल्ली
 ऑनलाइन शॉपिंग में धोखाधड़ी के मामले अक्सर सामने आते रहते हैं। कई बार ग्राहक महंगे आइटम मंगाते हैं और उन्हें इसके बदले कुछ और सामान थमा दिया जाता है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। केंद्र सरकार ने ग्राहकों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म्स के लिए ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी की हैं। ये गाइडलाइंस सेल्फ रेगुलटरी होंगी। देश में तेजी से बढ़ते डिजिटल शॉपिंग के चलन के बीच सरकार ने यह कदम उठाया है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने फूड एंड कंज्यूमर अफेयर्स मिनिस्ट्री के सुपरविजन में गाइडलाइंस तैयार की हैं। इसमें कहा गया है कि कैश ऑन डिलीवरी में रिफंड की प्रक्रिया ग्राहक की पसंद के मुताबिक होनी चाहिए। मसौदे पर संबंधित पक्षों से 15 फरवरी तक सुझाव मांगे गए हैं।

गाइडलाइंस तीन चरणों- लेनदेन के पहले, कॉन्ट्रैक्ट निर्माण और लेनदेन के बाद के स्टेज पर आधारित हैं। इसके अनुसार, प्लैटफॉर्म्स को बिजनेस पार्टनर्स, खासकर थर्ड-पार्टी सेलर्स का KYC करना जरूरी होगा। प्रोडक्ट की डिटेल जानकारी जैसे टाइटल, सेलर के कॉन्टैक्ट की जानकारी, आईडेंटिफिकेशन नंबर देना जरूरी होगा, ताकि कंज्यूमर प्रोडक्ट की उपयोगिता का आकलन कर सकें। इंपोर्टेड सामानों सामानों के लिए, प्लैटफॉर्म्स पर इंपोर्टर, पैकर और सेलर की डिटेल प्रमुखता से प्रदर्शित करना जरूरी होगा।

कॉन्ट्रैक्ट निर्माण गाइडलाइंस के मुताबिक, ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म्स कंज्यूमर की सहमति लेने, लेनदेन के रिव्यू के साथ ही कैंसलेशन, रिटर्न और रिफंड की पारदर्शी नीतियां रखनी होंगी। प्लैटफॉर्म्स को कंज्यूमर्स के लिए पूरे लेनदेन का रेकॉर्ड उपलब्ध कराना होगा। पेमेंट ऑप्शन जैसे क्रेडिट/डेबिट कार्ड, मोबाइल पेमेंट, ई-वॉलेट और बैंक ट्रांसफर उपलब्ध कराने होंगे। इसके साथ ही प्रोसेसिंग चार्ज की पूरी जानकारी देनी जरूरी होगी। प्लैटफॉर्म्स को इन्क्रिप्शन और दो-स्तरीय ऑथेंटिफिकेशन के साथ सुरक्षित पेमेंट सिस्टम लागू करना होगा। रेकरिंग पेमेंट के लिए, समय, अंतराल और अमाउंट की साफ जानकारी के साथ आसान ऑप्ट-आउट प्रसीजर रखना होगा। कैश-ऑन डिलिवरी रिफंड कंज्यूमर की पसंद के अनुसार किया जाएगा।

लेनदेन के बाद की गाइडलाइंस में नकली प्रोडक्ट के लिए रिफंड, रिप्लेसमेंट और एक्सचेंज के लिए साफ समयसीमा रखने की बात कही गई है। साथ ही समय पर डिलिवरी की जानकारी भी देने को कहा गया है। सरकार की इस पहल का उद्देश्य ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म्स पर कंज्यूमर के लिए सुरक्षित और पारदर्शी एक्सपीरियंस सुनिश्चित करना है। ड्राफ्ट गाइडलाइंस में जिक्र किया गया है, ‘ई-कॉमर्स के बढ़ते प्रभाव ने कंज्यूमर प्रोटेक्शन और विश्वास को लेकर नई चुनौतियां पेश की हैं। इस मामले में सेल्फ-गवर्नेंस के लिए साफ और प्रभावी नियमों और मानदंडों का महत्व बहुत अधिक है।’

admin

Related Posts

हवाई हादसों का दर्दनाक इतिहास: अजित पवार दुर्घटना से पहले इन 11 दिग्गजों की भी ऐसे ही हुई थी मौत

नई दिल्ली बुधवार की सुबह महाराष्ट्र और देश की राजनीति के लिए गहरे शोक की खबर लेकर आई, जब महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार और चार अन्य लोगों की एक…

हमें पता है क्या हो रहा है — UGC रेगुलेशन मामले में दखल देगा सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली जातिगत भेदभाव से जुड़े UGC के नए नियमों के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है। शीर्ष न्यायालय ने बुधवार को इस…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

धर्म

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

माघ माह की आखिरी एकादशी: इन 3 जगहों पर दीपक जलाते ही चमक उठेगा किस्मत का सितारा

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

शुक्र प्रदोष व्रत का महात्म्य: इस मुहूर्त में पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

आज का राशिफल: ग्रहों के परिवर्तन से किस राशि की बदलेगी किस्मत

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

श्रद्धा का प्रतीक बेलपत्र: क्यों महादेव को अति प्रिय है यह पत्ता, क्या है जन्म कथा

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों वर्जित?

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति

17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण, धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में, जानें भारत में सूतक काल की स्थिति