विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वाशिंगटन में क्वाड विदेश मंत्रियों की सार्थक बैठक में भाग लिया, सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति

वाशिंगटन/नई दिल्ली
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनके प्रशासन के शपथ ग्रहण के एक दिन बाद वाशिंगटन में क्वाड विदेश मंत्रियों की सार्थक बैठक में भाग लिया, जिसमें एजेंडा को मजबूत बनाने और सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। नये अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग, जापानी विदेश मंत्री ताकेशी इवाया तथा डॉ. जयशंकर के बीच क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक हुई। चार देशों की ओर से जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि वे आने वाले महीनों में क्वाड के काम को आगे बढ़ाने के लिए तत्पर हैं और भारत द्वारा आयोजित अगले क्वाड लीडर्स समिट की तैयारी के लिए नियमित आधार पर एक साथ मिलेंगे।
डॉ. जयशंकर ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि ट्रम्प प्रशासन के शपथ ग्रहण के एक दिन बाद क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक आयोजित की गयी, जो चार सदस्य देशों की विदेश नीति में क्वाड की प्राथमिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा, “आज वाशिंगटन डीसी में क्वाड विदेश मंत्रियों की एक सार्थक बैठक में भाग लिया। हमारी मेजबानी करने के लिए मार्को रुबियो और बैठक में भागीदारी के लिए पेनी वोंग तथा ताकेशी इवाया को धन्यवाद। यह महत्वपूर्ण है कि क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक ट्रम्प प्रशासन के उद्घाटन के कुछ घंटों के भीतर हई। यह अपने सदस्य देशों की विदेश नीति में इसकी प्राथमिकता को रेखांकित करता है।”
विदेश मंत्री ने कहा, “हमारी व्यापक चर्चाओं ने एक स्वतंत्र, खुले, स्थिर और समृद्ध हिंद-प्रशांत सुनिश्चित करने के विभिन्न आयामों को संबोधित किया। बड़ी सोच की महत्ता, एजेंडे को मजबूत बनाने और हमारे सहयोग को बढ़ाने पर सहमति बनी। आज की बैठक एक स्पष्ट संदेश देती है कि क्वाड अनिश्चित और अस्थिर दुनिया में वैश्विक भलाई के लिए एक ताकत बना रहेगा।”
चारों सदस्यों द्वारा संयुक्त वक्तव्य में कहा गया, “हम, अमेरिका के विदेश मंत्री तथा ऑस्ट्रेलिया, भारत और जापान के विदेश मंत्री, आज वाशिंगटन डी.सी. में एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र को मजबूत करने के लिए अपनी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि करने के लिए मिले, जहां कानून का शासन, लोकतांत्रिक मूल्य, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को बरकरार रखा जाता है और उसकी रक्षा की जाती है। हमारे चार राष्ट्र इस बात पर दृढ़ हैं कि समुद्री क्षेत्र सहित सभी क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय कानून, आर्थिक अवसर, शांति, स्थिरता और सुरक्षा हिंद-प्रशांत के लोगों के विकास और समृद्धि का आधार हैं। हम किसी भी ऐसी एकतरफा कार्रवाई का कड़ा विरोध करते हैं जो बलपूर्वक यथास्थिति को बदलने की कोशिश करती है।”
वक्तव्य में कहा गया, “हम बढ़ते खतरों के सामने क्षेत्रीय समुद्री, आर्थिक और प्रौद्योगिकी सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ विश्वसनीय और लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम आने वाले महीनों में क्वाड के काम को आगे बढ़ाने के लिए तत्पर हैं और भारत द्वारा आयोजित अगले क्वाड लीडर्स समिट की तैयारी के लिए नियमित रूप से एक साथ मिलेंगे।”

 

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